क्रांतिकारियों ने ट्रेन से सरकारी धन ले लिया, पर बाद में पुलिस ने दल के अधिकांश सदस्यों को पकड़ लिया; दिसंबर 1927 में चार को फाँसी दी गई।
01आठ नंबर डाउन
हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन को हथियारों के लिए धन चाहिए था। 9 अगस्त 1925 की शाम उसके सदस्य सहारनपुर से लखनऊ जाने वाली आठ नंबर डाउन ट्रेन में चढ़े, काकोरी के पास ज़ंजीर खींची, गार्ड को रोका और हथौड़ों से रेलवे के धन की लोहे की तिजोरी तोड़ी। उन्होंने तय किया था कि किसी यात्री का पैसा नहीं छुएँगे। नीचे उतरे एक यात्री की एक भटकी गोली से मृत्यु हो गई। कुछ ही मिनटों में दल धन लेकर अँधेरे में ओझल हो गया।
02काकोरी मुक़दमा
पूरे उत्तर भारत में पुलिस की धरपकड़ में लगभग चालीस लोग पकड़े गए। लम्बे मुक़दमे के बाद राम प्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ, राजेन्द्र लाहिड़ी और रोशन सिंह को मृत्युदंड मिला। लाहिड़ी को 17 दिसंबर 1927 को गोंडा में, और बिस्मिल को गोरखपुर, अशफ़ाक़उल्ला को फ़ैज़ाबाद और रोशन सिंह को इलाहाबाद में 19 दिसंबर को फाँसी दी गई। आर्यसमाजी बिस्मिल और धर्मनिष्ठ मुसलमान अशफ़ाक़उल्ला घनिष्ठ मित्र थे, और उनकी मित्रता स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बनी। चन्द्रशेखर आज़ाद कभी पकड़े नहीं गए और उन्होंने भगत सिंह के साथ हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के रूप में आंदोलन को फिर खड़ा किया।

काकोरी और उसके बलिदानियों ने भगत सिंह से आज़ाद तक क्रांतिकारियों की अगली पीढ़ी को प्रेरित किया, और बिस्मिल के गीत संघर्ष के गान बने।
