आज भी खड़ा

काकोरी

लखनऊ के पास का वह कस्बा जहाँ 9 अगस्त 1925 को हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के क्रान्तिकारियों ने एक रेलगाड़ी रोककर उसमें जा रहा सरकारी ख़ज़ाना लिया। इसके लिए उनमें से चार, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ, राजेन्द्र लाहिड़ी और रोशन सिंह, को दिसम्बर 1927 में फाँसी दी गई।

निर्माण: लखनऊ के पश्चिम का पुराना कस्बा; 9 अगस्त 1925 का रेल-कांडस्थान: उत्तर प्रदेश26.88° N, 80.80° E
  1. 9 अगस्त 1925
  2. 26 सितम्बर 1925
  3. 17–19 दिसम्बर 1927
  4. अगस्त 2021
चित्र: Yann (talk) · Public domain

019 अगस्त 1925

1924 में राम प्रसाद बिस्मिल और उनके साथियों द्वारा स्थापित हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन को शस्त्रों के लिए धन चाहिए था, और उन्होंने इसे भारतीयों से नहीं, सरकार से लेना तय किया। 9 अगस्त 1925 की शाम इसके दस सदस्य शाहजहाँपुर से लखनऊ जाने वाली आठ नम्बर डाउन गाड़ी में बैठे। काकोरी के पास उनमें से एक ने ज़ंजीर खींची। उन्होंने गार्ड को रोके रखा, रेलवे के रुपयों की लोहे की सन्दूक तोड़ी और उसे ले गए; एक यात्री, अहमद अली, एक भटकी गोली से मारा गया। चन्द्रशेखर आज़ाद उनमें थे। इस धावे ने सरकार को हिला दिया, जिसने पूरे प्रान्त पर पुलिस की पूरी शक्ति झोंक दी।

02मुक़दमा और फाँसी

26 सितम्बर 1925 से गिरफ़्तारियाँ आरम्भ हुईं, और काकोरी षड्यन्त्र केस में लखनऊ में लगभग चालीस लोगों पर मुक़दमा चला। बिस्मिल, अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ, राजेन्द्र लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह को मृत्युदण्ड मिला, और अन्यों को लम्बी सज़ाएँ; केवल आज़ाद कभी पकड़े नहीं गए। 17 दिसम्बर 1927 को लाहिड़ी को गोण्डा में, और 19 दिसम्बर को बिस्मिल को गोरखपुर, अशफ़ाक़ उल्ला को फ़ैज़ाबाद और रोशन सिंह को इलाहाबाद में फाँसी दी गई। आर्यसमाजी बिस्मिल और मुसलमान अशफ़ाक़ उल्ला की मित्रता स्वतन्त्रता आन्दोलन की कथा का अंग बन गई। काकोरी के पास बलिदानियों का स्मारक है, और 2021 में उत्तर प्रदेश सरकार ने इस घटना का नाम काकोरी ट्रेन एक्शन रखा।

इस स्थान की जीवन-गाथा

  1. 9 अगस्त 1925एचआरए के क्रान्तिकारी काकोरी के पास रेलगाड़ी से ख़ज़ाना लेते हैं।
  2. 26 सितम्बर 1925बड़े पैमाने पर गिरफ़्तारियाँ आरम्भ होती हैं।
  3. 17–19 दिसम्बर 1927लाहिड़ी, बिस्मिल, अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ और रोशन सिंह को फाँसी दी जाती है।
  4. अगस्त 2021घटना का आधिकारिक नाम काकोरी ट्रेन एक्शन रखा जाता है।