यह क्या कहता है
संस्कृत और अरबी दोनों न जानने वाले मैकॉले ने लिखा: ‘मुझे उनमें एक भी ऐसा नहीं मिला जो यह नकार सके कि एक अच्छे यूरोपीय पुस्तकालय की एक अलमारी भारत और अरब के समूचे देशी साहित्य के बराबर है।’ उद्देश्य उसने साफ़ कहा: ‘ऐसे लोगों का वर्ग, जो रक्त और रंग में भारतीय हों, पर रुचि, विचार, नैतिकता और बुद्धि में अंग्रेज़।’
यह भारत में औपनिवेशिक शिक्षा का आधार-पत्र है और उसके पीछे भारतीय विद्या के प्रति तिरस्कार को स्वयं लेखक के शब्दों में रखता है।









