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इतिवृत्त · 2 फ़रवरी 1835

मैकॉले का शिक्षा-विषयक कार्यवृत्त (मिनट)

प्राप्ति
गवर्नर-जनरल की परिषद के विधि-सदस्य टॉमस बैबिंगटन मैकॉले द्वारा कलकत्ता में लिखा
अब कहाँ
एच. शार्प (सं.), सिलेक्शन्स फ़्रॉम एजुकेशनल रिकॉर्ड्स, भाग 1 (1920) में मुद्रित

वह पत्र जिसने कम्पनी का धन संस्कृत और अरबी विद्या से हटाकर अंग्रेज़ी शिक्षा में लगाया; लॉर्ड विलियम बेंटिंक के 7 मार्च 1835 के प्रस्ताव ने इसे स्वीकार किया।

यह क्या कहता है

संस्कृत और अरबी दोनों न जानने वाले मैकॉले ने लिखा: ‘मुझे उनमें एक भी ऐसा नहीं मिला जो यह नकार सके कि एक अच्छे यूरोपीय पुस्तकालय की एक अलमारी भारत और अरब के समूचे देशी साहित्य के बराबर है।’ उद्देश्य उसने साफ़ कहा: ‘ऐसे लोगों का वर्ग, जो रक्त और रंग में भारतीय हों, पर रुचि, विचार, नैतिकता और बुद्धि में अंग्रेज़।’

यह क्या सिद्ध करता है

यह भारत में औपनिवेशिक शिक्षा का आधार-पत्र है और उसके पीछे भारतीय विद्या के प्रति तिरस्कार को स्वयं लेखक के शब्दों में रखता है।

इनका प्रमाण