01केन अरोक और कृस
जावा का इतिवृत्त पररातोन बताता है कि साधारण कुल के केन अरोक ने लोहार मपु गन्दरिंग के बनाए कृस से तुमापेल के स्वामी तुंगुल अमेतुंग को मारा, उनकी विधवा केन देदेस से विवाह किया और 1222 में केदिरी को उखाड़ फेंका। उन्होंने राजसी नाम राजस धारण किया। इतिवृत्त के अनुसार वही शापित कृस फिर उनकी और उनके उत्तराधिकारियों की जान लेता गया। 1247 में केन देदेस के पहले पति के पुत्र अनुषपति ने उनकी हत्या करवाई।
02दिवंगत राजाओं के मन्दिर
जावा के राजाओं की मृत्यु के बाद किसी मन्दिर में उस देवता के रूप में प्रतिष्ठा होती थी जिसमें वे लीन माने जाते थे। अनुषपति के चण्डी किदाल पर गरुड़ेय कथा है, गरुड़ अमृत लाकर अपनी माता को दासता से छुड़ाते हैं। विष्णुवर्धन चण्डी जागो में शिव और बौद्ध अमोघपाश रूप में पूजे गए। सिंहसारी की शान्त, आभूषणों से सजी प्रज्ञापारमिता प्रतिमा औपनिवेशिक काल में लाइडन ले जाई गई और 1978 में इंडोनेशिया लौटाई गई।
03कृतनगर और कुबलई ख़ान
1268 से राज करने वाले कृतनगर विद्वान तान्त्रिक दीक्षित और महत्त्वाकांक्षी राजा थे। 1275 में उन्होंने सुमात्रा को पमलायु अभियान भेजा, और 1286 में धर्माश्रय के मलय राजा को अमोघपाश की प्रतिमा भेजी। 1289 में जब कुबलई ख़ान का दूत मेंग ची अधीनता माँगने आया, कृतनगर ने उसके चेहरे पर दाग़ लगवाकर लौटा दिया। 1292 में, मंगोल बेड़े के पहुँचने से पहले ही, केदिरी के जयकटवांग ने आक्रमण करके उन्हें मार डाला। उनके दामाद रादेन विजय बच निकले और आगे मजपहित की नींव रखी।
शासक
- 1केन अरोक (राजस)गन्तेर में केदिरी को हराया1222–1247
- 2अनुषपतिचण्डी किदाल में स्मृति1247–1249
- 3तोहजय1249–1250
- 4विष्णुवर्धनचण्डी जागो में स्मृति1248–1268
- 5कृतनगरकुबलई ख़ान को ललकारा; जयकटवांग ने मारा1268–1292
उनकी विरासत
- चण्डी सिंहसारी, चण्डी जागो और चण्डी किदाल
- जावा की प्रज्ञापारमिता, अब जकार्ता के राष्ट्रीय संग्रहालय में
- किदाल के गरुड़ेय उत्कीर्ण चित्र
