01जयस्थिति मल्ल की व्यवस्था
लगभग 1201 में अरि मल्ल ने मल्ल उपाधि धारण की। 1349 में बंगाल के सुल्तान शम्सुद्दीन इलियास ने घाटी पर धावा बोला, मन्दिर जलाए और पशुपतिनाथ का लिंग तोड़ा; गोपालराजवंशावली इसका उल्लेख करती है। 1382–1395 तक राज करने वाले जयस्थिति मल्ल ने व्यवस्था लौटाई और भारत से आए ब्राह्मण विद्वानों की सहायता से घाटी के अनेक व्यावसायिक समुदायों के कर्तव्य निश्चित करने के लिए याद किए जाते हैं।
02तीन राज्य, तीन चौक
यक्ष मल्ल ने 1428 से 1482 तक पूरी घाटी पर राज किया। उनके बाद पुत्रों ने उसे बाँट लिया और घाटी तीन प्रतिद्वन्द्वी राज्यों में बँट गई, एक-दूसरे से एक दिन की पैदल दूरी पर। होड़ ने उन्हें निर्माता बनाया। पाटन के सिद्धिनरसिंह मल्ल ने 1637 में पत्थर का कृष्ण मन्दिर बनवाया। कान्तिपुर के प्रताप मल्ल, कवि जिन्होंने हनुमान ढोका के एक पत्थर पर पन्द्रह भाषाओं में लिखा, ने 1670 में रानी पोखरी खुदवाई। भक्तपुर के भूपतीन्द्र मल्ल ने 1702 में पाँच तल वाला न्यातपोल बनवाया, घाटी का सबसे ऊँचा मन्दिर।

03तलेजु और कुमारी
हर मल्ल महल के केन्द्र में राजदेवी तलेजु भवानी का मन्दिर था, जिसमें गिने-चुने लोग ही जा सकते थे। एक बालिका को जीवित कुमारी के रूप में पूजने और इन्द्र जात्रा पर राजा द्वारा उनसे टीका लेने की परम्परा मल्ल दरबारों से चली आती है। घाटी के उत्सव, काठमाण्डू की इन्द्र जात्रा, भक्तपुर की बिस्केट जात्रा, पाटन में रातो मछिन्द्रनाथ का रथ, सब उन्हीं के पंचांग में बँधे।
04गोरखा विजय
बँटे हुए तीनों राज्य गोरखा के पृथ्वीनारायण शाह के सामने नहीं टिक सके, जिन्होंने वर्षों तक घाटी की घेराबन्दी की। 1768 में इन्द्र जात्रा के दिन उनके सैनिक कान्तिपुर में घुसे और जयप्रकाश मल्ल भाग निकले। जल्द ही पाटन गिरा, और 1769 में भक्तपुर, जिससे मल्ल शासन का अन्त हुआ। उनके महल, मन्दिर और आँगन यूनेस्को द्वारा 1979 में घोषित काठमाण्डू घाटी विश्व धरोहर का बड़ा भाग हैं।

शासक
- 1अरि मल्लमल्ल उपाधि लेने वाले पहले राजाc. 1201–1216
- 2जयस्थिति मल्लव्यवस्था लौटाई; सामाजिक कर्तव्य निश्चित किए1382–1395
- 3यक्ष मल्लपूरी घाटी के अन्तिम राजा1428–1482
- 4सिद्धिनरसिंह मल्ल (पाटन)1637 में कृष्ण मन्दिर बनवाया1619–1661
- 5प्रताप मल्ल (कान्तिपुर)कवि राजा; रानी पोखरी, 16701641–1674
- 6भूपतीन्द्र मल्ल (भक्तपुर)1702 में न्यातपोल बनवाया1696–1722
- 7जयप्रकाश मल्ल (कान्तिपुर)पृथ्वीनारायण शाह से काठमाण्डू हारे1735–1768
- 8रणजित मल्ल (भक्तपुर)अन्तिम मल्ल राजा1722–1769
उनकी विरासत
- काठमाण्डू, पाटन और भक्तपुर के दरबार चौक
- न्यातपोल और पाटन का कृष्ण मन्दिर
- जीवित कुमारी और इन्द्र जात्रा उत्सव
- नेवार काष्ठकला, धातु-ढलाई और पगोडा निर्माण




