पुनर्निर्मित

कृष्ण मन्दिर, पाटन

पाटन दरबार चौक पर तीन मंज़िल और इक्कीस शिखरों वाला पत्थर का शिखर मन्दिर, जिसे सिद्धि नरसिंह मल्ल ने 1637 में बनवाया। इसके पत्थर के फलकों पर महाभारत और रामायण के दृश्य नेवारी लेखों सहित उकेरे गए हैं।

निर्माण: 1637, राजा सिद्धि नरसिंह मल्लस्थान: ललितपुर, बागमती प्रदेश, Nepalदेवता: श्रीकृष्ण, राधा और रुक्मिणी के साथ27.67° N, 85.33° E
  1. 1637
  2. 1979
  3. अप्रैल 2015
  4. 2018
चित्र: Ranjit Thaoa · CC BY-SA 4.0

01पत्थर में राजा का स्वप्न

पाटन के सिद्धि नरसिंह मल्ल परम वैष्णव थे। नगर की परम्परा कहती है कि उन्होंने स्वप्न में श्रीकृष्ण और राधा को महल के सामने खड़े देखा और उसी स्थान पर मन्दिर बनवाया। ईंट और काठ के पगोडों की घाटी में उन्होंने पूरा पत्थर का उत्तर भारतीय शिखर चुना। भूतल पर श्रीकृष्ण हैं; ऊपर की मंज़िल पर शिव, और सबसे ऊपर लोकेश्वर। पहली मंज़िल के चारों ओर महाभारत का फलक है, दूसरी के चारों ओर रामायण का, और हर दृश्य पर पुरानी नेवारी में लेख है, ताकि लोग चलते-चलते कथा पढ़ सकें।

02पाटन की जन्माष्टमी

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर संध्या से ही चौक भर जाता है, और स्त्रियाँ रात भर मन्दिर की सीढ़ियों पर भजन गाती हैं, जबकि हर कगार पर दीये जलते हैं। मन्दिर के सामने एक पत्थर के स्तम्भ पर गरुड़ हाथ जोड़े घुटनों के बल अपने प्रभु की ओर मुख किए बैठे हैं। 2015 के भूकम्प में ऊपर के मण्डप दरक गए थे; 2018 में जीर्णोद्धार के बाद मन्दिर फिर खुला। यह 1979 में घोषित काठमाण्डू घाटी विश्व धरोहर का भाग है।

इस स्थान की जीवन-गाथा

  1. 1637सिद्धि नरसिंह मल्ल मन्दिर पूरा कराते हैं।
  2. 1979पाटन दरबार चौक काठमाण्डू घाटी विश्व धरोहर में सम्मिलित होता है।
  3. अप्रैल 2015गोरखा भूकम्प से मन्दिर को क्षति होती है।
  4. 2018जीर्णोद्धार के बाद मन्दिर फिर खुलता है।
दर्शन और यात्रा

बागमती पार काठमाण्डू के दक्षिण में पाटन दरबार चौक। गर्भगृह में केवल हिन्दू जा सकते हैं; फलक चबूतरे से देखे जा सकते हैं।