01सोनगढ़ से बड़ौदा
पीलाजीराव गायकवाड़ गुजरात के मराठा सेनापति दाभाडे परिवार के अधीन थे, और 1720 के दशक में उन्होंने सोनगढ़ के पहाड़ी किले को अड्डा बनाकर वहीं से मुग़ल सूबे पर धावे किए। 1732 में डाकोर में उनकी हत्या हुई। उनके पुत्र दामाजीराव ने 1734 में मुग़लों से बड़ौदा लिया, और 1753 में अहमदाबाद मराठों के हाथ आया। दामाजी 1761 में पानीपत में लड़े और जीवित लौटे। 1768 में उनके देहान्त के बाद पुत्रों के लम्बे झगड़े से पहले पेशवा और फिर अंग्रेज़ बड़ौदा के मामलों में घुस आए।
02सयाजीराव तृतीय
1875 में अंग्रेज़ों ने मल्हारराव को हटाया, और विधवा महारानी जमनाबाई ने नासिक ज़िले के कवळाणे गाँव के एक किसान के बारह वर्षीय पुत्र को गोद लिया, जो सयाजीराव तृतीय बने। उन्होंने चौंसठ वर्ष राज किया। उनके समय बड़ौदा ने प्राथमिक शिक्षा निःशुल्क और अनिवार्य की, पहले 1893 में अमरेली तालुका में और 1906 में पूरे राज्य में; गाँव-गाँव पुस्तकालय खोले; 1908 में बैंक ऑफ़ बड़ौदा की स्थापना की; और बाल-विवाह पर रोक लगाई। उन्होंने कोलम्बिया विश्वविद्यालय में भीमराव आम्बेडकर की पढ़ाई का ख़र्च उठाया, और श्री अरविन्द 1893 से 1906 तक उनकी सेवा में रहे। लक्ष्मी विलास महल 1890 में पूरा हुआ।

03भारत संघ में
सयाजीराव के पौत्र प्रतापसिंहराव ने 1947 में विलय-पत्र पर हस्ताक्षर किए, और 1 मई 1949 को बड़ौदा बम्बई राज्य में मिल गया। उसी वर्ष बड़ौदा कॉलेज से बना महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय पुराने शासक का नाम लिए हुए है, और महल, घराने का स्मारक कीर्ति मन्दिर और 1894 में सयाजीराव का खोला बड़ौदा संग्रहालय आज भी नगर में खड़े हैं।
शासक
- 1पीलाजीरावसंस्थापक; सोनगढ़ सेc. 1721–1732
- 2दामाजीराव द्वितीय1734 में बड़ौदा लिया1732–1768
- 3फ़तेहसिंहराव प्रथमभाई के संरक्षक रूप में शासन1771–1789
- 4गोविन्दराव1793–1800
- 5आनन्दराव1800–1819
- 6सयाजीराव द्वितीय1819–1847
- 7गणपतराव1847–1856
- 8खण्डेराव1856–1870
- 9मल्हाररावअंग्रेज़ों ने हटाया1870–1875
- 10सयाजीराव तृतीयनिःशुल्क अनिवार्य शिक्षा; बैंक ऑफ़ बड़ौदा1875–1939
- 11प्रतापसिंहरावभारत में विलय1939–1949
उनकी विरासत
- वडोदरा का लक्ष्मी विलास महल (1890)
- 1893 से निःशुल्क अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा
- बैंक ऑफ़ बड़ौदा (1908)
- बड़ौदा का ग्राम-पुस्तकालय आन्दोलन और केन्द्रीय पुस्तकालय
- महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, बड़ौदा




