चित्र: Rudolf 1922 · Public domain
आचार्य

श्री अरविन्द

क्रान्तिकारी राष्ट्रवादी, फिर पुदुच्चेरी के योगी

1872 ई.—1950 ई.

15 अगस्त 1872 – 5 दिसम्बर 1950

इंग्लैंड में पढ़े अरविन्द घोष स्वदेशी आन्दोलन के उग्र पक्ष के नेता थे; अलीपुर जेल में उनका मन योग की ओर मुड़ा और जीवन के अंतिम चालीस वर्ष उन्होंने पुदुच्चेरी में बिताए। ‘द लाइफ़ डिवाइन’ और महाकाव्य ‘सावित्री’ में उन्होंने पृथ्वी पर दिव्य जीवन का दर्शन रखा।

“मैं कहता हूँ कि सनातन धर्म ही हमारे लिए राष्ट्रवाद है।”Sri Aurobindo, Uttarpara speech, 30 May 1909

01बड़ौदा, वन्दे मातरम्, अलीपुर

15 अगस्त 1872 को कलकत्ता में जन्मे और सात वर्ष की आयु में इंग्लैंड भेजे गए अरविन्द ने कैम्ब्रिज के किंग्स कॉलेज में शास्त्रीय भाषाएँ पढ़ीं। 1893 में लौटकर वे बड़ौदा के गायकवाड़ की सेवा में रहे, संस्कृत और बांग्ला सीखी, और नरमपंथी कांग्रेस के विरुद्ध लिखने लगे। 1906 में कलकत्ता आकर उन्होंने दैनिक ‘वन्दे मातरम्’ का सम्पादन किया और पूर्ण स्वराज के लिए तिलक के साथ खड़े हुए। 2 मई 1908 को अलीपुर बम काण्ड में गिरफ़्तार होकर वे एक वर्ष विचाराधीन क़ैदी रहे, और वहीं, उनके अपने शब्दों में, दीवारों, सलाख़ों और क़ैदियों में वासुदेव के दर्शन हुए। मई 1909 में चित्तरंजन दास ने उन्हें बरी कराया।

02पुदुच्चेरी

30 मई 1909 को उत्तरपाड़ा में उन्होंने जेल के अनुभव बताए और कहा कि उनके लिए सनातन धर्म ही राष्ट्रवाद है। एक वर्ष के भीतर, भीतरी आदेश पर, वे ब्रिटिश भारत छोड़कर 4 अप्रैल 1910 को फ़्रांसीसी पुदुच्चेरी पहुँचे। वहाँ वे योग और लेखन में लीन हुए: 1914 से पत्रिका ‘आर्य’, ‘द लाइफ़ डिवाइन’, ‘द सिंथेसिस ऑफ़ योग’, वेद और गीता पर भाष्य, और ‘सावित्री’, जिसे वे अंत तक सुधारते रहे। 1926 से मीरा अल्फ़ासा, ‘श्रीमाँ’, ने श्री अरविन्द आश्रम को सँभाला। 5 दिसम्बर 1950 को वहीं उनका देहावसान हुआ। भारत उनके पचहत्तरवें जन्मदिन पर स्वतंत्र हुआ।

बड़ौदा के गायकवाड़
राजवंश · लगभग 1721–1949 ई.बड़ौदा के गायकवाड़पीलाजीराव गायकवाड़ 1720 के दशक में मराठा शस्त्र मुग़ल गुजरात में ले गए, और उनके पुत्र दामाजी ने बड़ौदा लिया। यह घराना 1949 तक बड़ौदा पर राज करता रहा, और सयाजीराव तृतीय के समय यह भारत की सबसे सुशासित रियासत बना।पढ़ें →

“मैं कहता हूँ कि सनातन धर्म ही हमारे लिए राष्ट्रवाद है।”

Sri Aurobindo, Uttarpara speech, 30 May 1909