01लिंग वाला पर्वत
दक्षिणी लाओस में मेकांग के ऊपर एक शिखर है, जिसकी चोटी पर पत्थर की प्राकृतिक नोक उठी है। ख़मेर इसे लिंगपर्वत कहते थे, वह पर्वत जो स्वयं लिंग है। चीन का सुई इतिहास चेनला की राजधानी के पास एक मन्दिर का वर्णन करता है जहाँ राजा रात में पूजा करते थे। इसी पर्वत की तलहटी का वाट फू मन्दिर अगली छह शताब्दियों तक बार-बार बनाया जाता रहा। चेनला के आरम्भिक राजा इसी प्रदेश से दक्षिण की ओर बढ़े।
02ईशानवर्मन का नगर
छठी शताब्दी के उत्तरार्ध में भववर्मन प्रथम और उनके भाई चित्रसेन, जिन्होंने महेन्द्रवर्मन नाम से राज किया, फूनान से स्वतन्त्र हो गए। महेन्द्रवर्मन के पुत्र ईशानवर्मन प्रथम ने ईशानपुर बसाया, जो आज सम्बोर प्रेई कुक कहलाता है। वहाँ परकोटों में बँटे सौ से अधिक ईंटों के मन्दिर हैं। कुछ की दीवारों पर उड़ते विमान-महल खुदे हैं, और अष्टकोणीय शिखर कहीं और नहीं मिलते। यूनेस्को ने 2017 में इसे विश्व धरोहर घोषित किया।

03स्थल चेनला और जल चेनला
लगभग 681 में जयवर्मन प्रथम के देहान्त के बाद राज्य बिखर गया। आठवीं शताब्दी के चीनी अभिलेख उत्तर में 'स्थल चेनला' और डेल्टा व समुद्रतट पर 'जल चेनला' की बात करते हैं, दोनों में कई प्रतिद्वन्द्वी सामन्त थे। इसी बिखरे देश में जावा से लौटे एक राजकुमार जयवर्मन ने 802 में महेन्द्रपर्वत पर स्वयं को चक्रवर्ती घोषित किया। यहीं चेनला का अन्त होता है और अंकोर के ख़मेर साम्राज्य का आरम्भ।
शासक
- 1भववर्मन प्रथमc. 550–600
- 2महेन्द्रवर्मन (चित्रसेन)मेकांग किनारे शैव शिलालेख छोड़ेc. 600–616
- 3ईशानवर्मन प्रथमईशानपुर (सम्बोर प्रेई कुक) बसायाc. 616–637
- 4भववर्मन द्वितीयc. 639–657
- 5जयवर्मन प्रथमसंगठित चेनला के अन्तिम राजाc. 657–681
उनकी विरासत
- सम्बोर प्रेई कुक, 2017 से यूनेस्को विश्व धरोहर
- लिंगपर्वत के नीचे वाट फू का आरम्भिक मन्दिर
- ख़मेर भाषा का सबसे पुराना तिथियुक्त शिलालेख (अंकोर बोरेई, 611 ई.)
- हरिहर प्रतिमाएँ, शिव और विष्णु एक ही देह में
