ముద్దుగారే యశోద ముంగిటి ముత్యము వీడు
దిద్దరాని మహిమల దేవకీ సుతుడు

అంత నింత గొల్లెతల అరచేతి మాణిక్యము
పంతమాడే కంసుని పాలి వజ్రము
కాంతుల మూడు లోకాల గరుడ పచ్చ బూస
చెంతల మాలో నున్న చిన్ని కృష్ణుడు

రతికేళి రుక్మిణికి రంగు మోవి పగడము
మితి గోవర్ధనపు గోమేధికము
సతమై శంఖ చక్రాల సందుల వైడూర్యము
గతియై మమ్ము గాచేటి కమలాక్షుడు

కాళింగుని తలలపై గప్పిన పుష్యరాగము
యేలేటి శ్రీ వేంకటాద్రి యింద్రనీలము
పాల జలనిధి లోన బాయని దివ్య రత్నము
బాలునివలె దిరిగీ పద్మ నాభుడు

अर्थ

पल्लवी: यह यशोदा के आँगन का मोती है, लाड़ से भरा; देवकी का पुत्र, जिसकी महिमा को कोई नाप या सुधार नहीं सकता।

1. इधर-उधर गोपियों की हथेलियों का माणिक; उससे होड़ करने वाले कंस के हिस्से का हीरा; तीनों लोकों को प्रकाश देने वाला पन्ने का मनका; हमारे पास रहने वाला नन्हा कृष्ण।
2. प्रेम-लीला में रुक्मिणी के लिए रंगीन अधरों का मूँगा; विशाल गोवर्धन का गोमेद; शंख और चक्र के बीच सदा जड़ा वैदूर्य; हमारी गति बनकर रक्षा करने वाले कमलनयन।
3. कालिय के फणों पर छाया पुखराज; श्री वेंकटाद्रि का स्वामी इन्द्रनील; क्षीरसागर को कभी न छोड़ने वाला दिव्य रत्न: पद्मनाभ बालक बनकर घूमते हैं।

इस भजन के बारे में

अन्नमाचार्य नवरत्न गिनते हैं और हर रत्न कृष्ण में पाते हैं: यशोदा के आँगन का मोती, गोपियों के हाथ का माणिक, कंस के लिए हीरा, पन्ना, मूँगा, गोमेद, वैदूर्य, कालिय के फणों पर पुखराज, और वेंकटाद्रि का नीलम। अंतिम रत्न स्वयं भगवान हैं, जो क्षीरसागर को कभी नहीं छोड़ते और फिर भी बालक बनकर दौड़ते हैं। उनके परिवार ने जिन ताम्रपत्रों पर उनके गीत खुदवाए, उन पर इसका राग सालंगनाट लिखा है; आज यह कुरिञ्जी में गाया जाता है, जो लोरी का राग है, और आन्ध्र तथा कर्णाटक की माताएँ इसे रात को बच्चों को सुनाती हैं।

Telugu text: te.wikisource.org, ‘ముద్దుగారే యశోద ముంగిటి ముత్యము వీడు’ (అన్నమయ్య పాటలు; raga సాళంగనాట); checked against karnatik.com c1182 (Kurinji)