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थावे भवानी मन्दिर, गोपालगंज

गोपालगंज के पास थावे का दुर्गा मन्दिर, पश्चिमी बिहार का प्रमुख देवी धाम, जिसकी कथा रहषु नाम के एक साधारण भक्त से जुड़ी है जिसकी भक्ति देवी को यहाँ ले आई।

निर्माण: हथुआ राजाओं के पुराने गढ़ के पास का स्थान; वर्तमान मन्दिर बाद कास्थान: बिहार (गोपालगंज ज़िला)देवता: माँ दुर्गा, थावे वाली (सिंहासिनी भवानी) रूप में26.43° N, 84.39° E
चित्र: Manurrt · CC BY 3.0

01रहषु भगत और राजा

मन्दिर की कथा हर नवरात्रि में सुनाई जाती है। देवी के निर्धन भक्त रहषु ने अकाल में उनकी कृपा से परिवार पाला। वहाँ के राजा मनन सिंह को विश्वास नहीं हुआ और उन्होंने रहषु को अपने सामने देवी को बुलाने का आदेश दिया। रहषु ने आदेश वापस लेने की विनती की; राजा नहीं माने। देवी आईं, कामाख्या से अन्य धामों होते हुए, और थावे में प्रकट हुईं, और उनके प्रकट होते ही अहंकारी राजा का घर गिर गया। मन्दिर के पास रहषु का स्थान है, और यात्री उनके दर्शन भी करते हैं, क्योंकि वे कहते हैं, भक्त के बिना दर्शन पूरा नहीं होता।

02हथुआ से सम्बन्ध

मन्दिर के पास का खण्डहर गढ़ और महल हथुआ राज का था, सारण का पुराना ज़मींदार घराना, और राजा मन्दिर के संरक्षक रहे। आँगन में एक पुराना वृक्ष है जिस पर यात्री धागे बाँधते हैं। चैत्र और आश्विन नवरात्रि में बड़ा मेला लगता है, और यह मन्दिर गोरखपुर और सिवान के बीच आने-जाने वाले यात्रियों का पड़ाव है।

दर्शन और यात्रा

थावे गोपालगंज से सिवान मार्ग पर 6 किमी है और इसका अपना रेलवे जंक्शन है।