01प्रजा द्वारा चुना गया राजा
मुख्य वंश समाप्त होने के बाद नन्दिवर्मन द्वितीय लगभग 731 ई. में पल्लव कुल की एक उपशाखा से सिंहासन पर आए। मन्दिर के चारों ओर की परिक्रमा के फलक बताते हैं कि यह कैसे हुआ: पुराने राजा की मृत्यु, उत्तराधिकारी की खोज, दूर से लाया गया चौदह वर्ष का राजकुमार, जिसे मन्त्रियों और प्रजा ने अभिषिक्त किया। पल्लव ग्रन्थ लिपि के छोटे लेख दृश्यों के नाम बताते हैं। पहले के फलक राजाओं की पूरी परम्परा में पीछे जाते हैं। उस समय का कोई और मन्दिर अपने ही दीवारों पर किसी वंश का इतिहास इस तरह नहीं रखता।
02विष्णु के तीन तल
विमान तीन तलों में बना है, हर तल का अपना गर्भगृह: भूतल पर विष्णु बैठे, पहले तल पर शयन करते, दूसरे पर खड़े। ऊपर के दोनों मन्दिर भीतर की सँकरी सीढ़ी से पहुँचे जाते हैं और एकादशी को खोले जाते हैं। यह दिव्य देशम है, जिसे तिरुमंगै आळ्वार ने पल्लव राजा की उपाधि परमेश्वर के नाम पर परमेश्वर विण्णगरम कहकर गाया। यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का संरक्षित स्मारक है और आज भी इसमें पूजा होती है।
इस स्थान की जीवन-गाथा
- लगभग 731 ई.नन्दिवर्मन द्वितीय पल्लवमल्ल राजा बनते हैं।
- 8वीं शताब्दीपल्लव इतिहास की मूर्तियों वाली परिक्रमा सहित मन्दिर बनता है।
कांचीपुरम नगर में, रेलवे स्टेशन से लगभग 1 किमी। परिक्रमा के धुँधले फलक देखने के लिए टॉर्च रखें।




