01आँखों के बदले लाठी
तिरुवोट्रियूर में संगिलियार को दी शपथ तोड़ने पर सुन्दरर की दृष्टि गई, और वे हर धाम पर विनती करते मार्ग पर निकल पड़े। मन्दिर की कथा कहती है कि तिरुवेण्पाक्कम में स्वामी ने उन्हें ऊन्ऱु कोल, टेकने की लाठी दी; आहत सुन्दरर ने उसे वापस फेंका और वह नन्दी को लगी, जिनका सींग आज तक टूटा है। यहाँ का उनका पदिगम अपने स्वामी से बहस करते भक्त की आवाज़ है। जब वे कांची की ओर बढ़े तो देवी ने बिजली-सी चमक बनकर राह दिखाई, इसलिए वे मिन्नोलि अम्मै हैं।
02जलाशय के नीचे
तेवारम-काल का मन्दिर वेण्पाक्कम गाँव में था। जब 1940 के दशक में मद्रास के लिए जल संचय को पूण्डि जलाशय बना, गाँव और मन्दिर डूब गए। मूर्तियाँ, नक्काशी और मण्डप के स्तम्भ निकालकर जलाशय के तट पर नए मन्दिर में लगाए गए, जिसका कुम्भाभिषेक 1968 में हुआ। पानी कम होने पर पुराना मन्दिर अब भी दिख जाता है। वैकासि का ब्रह्मोत्सव मुख्य उत्सव है।
इस स्थान की जीवन-गाथा
- 1968 ई.पूण्डि जलाशय के तट पर नए मन्दिर का कुम्भाभिषेक होता है।
पूण्डि में, जलाशय के उत्तरी ओर, तिरुवल्लूर–ऊत्तुक्कोट्टै मार्ग पर।




