01गोंड नगर, भोंसलों की राजधानी
देवगढ़ के गोंड राज्य के बख़्त बुलन्द शाह ने लगभग 1702 में नाग नदी के किनारे कई बस्तियों को मिलाकर नगर बसाया और उसे परकोटा दिया। उनके घराने के उत्तराधिकार-झगड़ों में रघुजी भोंसले बुलाए गए, और 1740 के दशक तक नागपुर उनका हो गया। यहीं से रघुजी की सेनाएँ वर्षों तक बंगाल पर चढ़ती रहीं, जब तक 1751 में अलीवर्दी ख़ाँ ने ओडिशा का राजस्व नहीं सौंप दिया। भोंसलों ने सौ वर्ष नागपुर रखा। नवम्बर 1817 में अप्पा साहेब भोंसले की सेना ने सीताबर्डी पहाड़ी पर अंग्रेज़ी रेज़िडेंसी पर हमला किया और 26–27 नवम्बर को पीछे धकेल दी गई; राज्य आश्रित बनकर बचा रहा। 1853 में रघुजी तृतीय निःसंतान मरे, तो डलहौज़ी ने उसे हड़प लिया।
02संघ और दीक्षाभूमि
1861 से नागपुर मध्य प्रान्त की राजधानी रहा। 1925 की विजयादशमी, 27 सितम्बर को, डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में कुछ युवकों को इकट्ठा कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की; दैनिक शाखा यहीं से चली, और संघ का मुख्यालय तथा रेशिमबाग में हेडगेवार का स्मृति मन्दिर आज भी इसी नगर में हैं। 14 अक्टूबर 1956 को डॉ. भीमराव आम्बेडकर ने दीक्षाभूमि पर कई लाख अनुयायियों के साथ बौद्ध दीक्षा ली, और सात सप्ताह बाद उनका देहांत हुआ। नगर देश का भौगोलिक केन्द्र भी माना जाता है; अंग्रेज़ी सर्वेक्षण का ज़ीरो माइल पत्थर विधान भवन के पास है।
इस स्थान की जीवन-गाथा
- लगभग 1702देवगढ़ के बख़्त बुलन्द शाह नागपुर बसाते हैं।
- 1740 का दशकरघुजी भोंसले नागपुर को अपने राज्य की राजधानी बनाते हैं।
- 26–27 नवम्बर 1817सीताबर्डी का युद्ध; रेज़िडेंसी पर अप्पा साहेब का आक्रमण विफल।
- 1853रघुजी तृतीय की मृत्यु पर कंपनी नागपुर राज्य हड़प लेती है।
- 27 सितम्बर 1925विजयादशमी पर डॉ. के. बी. हेडगेवार नागपुर में रा.स्व. संघ की स्थापना करते हैं।
- 14 अक्टूबर 1956डॉ. आम्बेडकर दीक्षाभूमि पर बौद्ध दीक्षा लेते हैं।





