खंडहर

माण्डू (माण्डवगढ़)

विन्ध्य का एक पठार जिसे 37 किमी की प्राचीर घेरती है, परमारों का मण्डपदुर्ग, जिसे 1305 में अलाउद्दीन की सेना ने लिया और मालवा के सुल्तानों ने राजधानी बनाया; इसके किनारे बाज़ बहादुर और रानी रूपमती के महल हैं।

निर्माण: परमार पहाड़ी दुर्ग; 15वीं शताब्दी के आरम्भ से मालवा के सुल्तानों की राजधानीस्थान: मध्य प्रदेश22.36° N, 75.40° E
  1. 1305
  2. 15वीं शताब्दी का आरम्भ
  3. 1531
  4. 1535
  5. 1561
  6. 1617
  7. 1730 का दशक
चित्र: Bernard Gagnon · CC BY-SA 3.0

01मण्डपदुर्ग

धार के परमार इस पठार को मण्डपदुर्ग नाम से दुर्ग के रूप में रखते थे और कठिन वर्षों में यहीं शरण लेते थे। 1305 में अलाउद्दीन ख़िलजी के सेनापति ऐनुल मुल्क मुल्तानी ने मालवा लिया और परमार राजा महलकदेव को मारा, और माण्डू दिल्ली के सूबेदारों के हाथ गया। तैमूर की लूट के बाद दिल्ली बिखरी तो दिलावर ख़ाँ ग़ोरी स्वतन्त्र हो गया, और उसके पुत्र होशंगशाह ने राजधानी धार से माण्डू लाई। होशंग का संगमरमर का मक़बरा और जामा मस्जिद, दो तालाबों के बीच जहाज़ महल और हिण्डोला महल इसी सल्तनत-नगर के हैं। 1436 में गद्दी हथियाने वाला महमूद ख़िलजी वर्षों तक मेवाड़ के राणा कुम्भा से लड़ा, और दोनों पक्षों ने विजय का दावा करते हुए स्तम्भ खड़े किए।

02रूपमती का मण्डप

1531 में गुजरात के बहादुरशाह ने माण्डू लिया, और 1535 में हुमायूँ ने उससे छीना। अन्तिम स्वतन्त्र शासक बाज़ बहादुर अपने संगीत और रूपमती के लिए याद किया जाता है, नर्मदा प्रदेश की वह गायिका जिसका दक्षिणी छोर पर बना मण्डप निमाड़ के मैदान पर नदी की ओर झाँकता है। 1561 में अकबर के सेनापति अधम ख़ाँ ने सारंगपुर में बाज़ बहादुर को हराया और माण्डू पर चढ़ा, और रूपमती ने पकड़े जाने के बदले विष खा लिया, जैसा मालवा के लोकगीत और अकबर के अपने इतिहासकार बताते हैं। जहाँगीर ने 1617 में माण्डू में महीनों बिताए और इसकी वर्षा का वर्णन लिखा। 1730 के दशक में मराठों ने मालवा लिया, और माण्डू धार के पवारों के अधीन आया। प्राचीर के भीतर रेवा कुण्ड और एक मुग़ल मण्डप में बना नीलकण्ठ महादेव का स्थान आज भी दर्शन के लिए जाते हैं।

इस स्थान की जीवन-गाथा

  1. 1305ऐनुल मुल्क मुल्तानी मालवा लेकर परमार राजा महलकदेव को मारता है।
  2. 15वीं शताब्दी का आरम्भहोशंगशाह मालवा सल्तनत की राजधानी धार से माण्डू लाता है।
  3. 1531गुजरात का बहादुरशाह माण्डू लेता है।
  4. 1535हुमायूँ बहादुरशाह से माण्डू छीनता है।
  5. 1561अधम ख़ाँ बाज़ बहादुर को हराता है; रूपमती विष खा लेती हैं।
  6. 1617जहाँगीर वर्षा ऋतु में माण्डू में ठहरता है।
  7. 1730 का दशकमराठे मालवा लेते हैं; माण्डू धार के पवारों के पास जाता है।
दर्शन और यात्रा

माण्डू धार होकर इन्दौर से 100 किमी है। वर्षा ऋतु में, जुलाई से सितम्बर, जाएँ, जब तालाब भरते हैं और पठार हरा हो जाता है।