आज भी खड़ा

महाकालेश्वरर मन्दिर, इरुम्बै माकालम

पुदुच्चेरी के पास तेवारम के माकालम धामों में एक, जहाँ स्वयम्भू लिंग का ऊपरी भाग तीन टुकड़ों में फटा है और एक टुकड़ा गिर चुका है। सम्बन्दर ने इसे गाया।

निर्माण: ऊपर से फटे स्वयम्भू लिंग वाला ग्राम-मन्दिरस्थान: तमिलनाडु (विलुप्पुरम ज़िला, वानूर तालुका, पुदुच्चेरी के पास)देवता: भगवान शिव महाकालेश्वरर (माकालनाथ) रूप में; देवी कुयिलमोऴि अम्मै (मधुरसुन्दरी)12.01° N, 79.79° E
चित्र: Arunankapilan · CC BY-SA 3.0

01फटा लिंग

देवी का नाम कुयिलमोऴि है, जिनकी वाणी कोयल का गीत है। शिव के गण महाकाल और सिद्ध कडुवेलि सिद्धर यहाँ के उपासकों में गिने जाते हैं। लिंग स्वयम्भू है, उसका शीर्ष तीन भागों में फटा है और एक भाग गिर गया है, इसलिए ऊपर से वह खोखला-सा दिखता है। सम्बन्दर का पद माकालम को वह स्थान कहता है जहाँ निर्मल मन वाले फूल लेकर उन स्वामी को सजाने आते हैं जो निर्मल भस्म लगाते हैं, वृषभ पर चढ़ते हैं और अपने द्वारा उधेड़े हाथी की खाल ओढ़ते हैं।

दर्शन और यात्रा

वानूर तालुका में तिरु अरसिलि से कुछ किमी, किलियनूर से लगभग 14 किमी, पुदुच्चेरी के पश्चिम।