आज भी खड़ा

अगस्तीश्वरर मन्दिर, किलियनूर (तिरुक्किलियन्नवूर)

तिण्डिवनम–पुदुच्चेरी मार्ग पर अगस्त्य का एक शान्त धाम, जिसे सम्बन्दर ने तीसरी तिरुमुरै के एक पदिगम में गाया।

निर्माण: राजगोपुर-रहित छोटा मन्दिर, चोल मूल का माना जाता हैस्थान: तमिलनाडु (विलुप्पुरम ज़िला, तिण्डिवनम के पास)देवता: भगवान शिव अगस्तीश्वरर रूप में; देवी अखिलाण्डेश्वरी12.11° N, 79.75° E
चित्र: Ssriram mt · CC BY-SA 4.0

01अगस्त्य का किलियनूर

अगस्त्य ने यहाँ पूजा की और उनकी अपनी सन्निधि है। मन्दिर में न राजगोपुर है न ध्वजस्तम्भ; बाहरी प्राकार में क्रोधन भैरव और काल भैरव साथ-साथ खड़े हैं, और भीतरी में विनायक, गजलक्ष्मी, वल्ली-देवयानी सहित मुरुगन, महाविष्णु, ब्रह्मा, नवग्रह, सूर्य और चन्द्र हैं। अखिलाण्डेश्वरी का अपना देवालय है, और कहा जाता है कि महाशिवरात्रि की रात नन्दी उनकी पूजा करते हैं। शमी यहाँ का स्थल-वृक्ष है। तेवारम के दो और धाम, तिरु अरसिलि और इरुम्बै माकालम, 15 किमी के भीतर हैं।

दर्शन और यात्रा

तिण्डिवनम से पुदुच्चेरी मार्ग पर लगभग 18 किमी। दर्शन का समय छोटा है (लगभग सुबह 8–दोपहर 12, शाम 5:30–7); पहले पूछ लें।