01हर कुरल में सात शब्द
कुरल सात पदों का दोहा है, पहली पंक्ति में चार और दूसरी में तीन। तिरुवल्लुवर ने ऐसे 1,330 कुरल लिखे, दस-दस के 133 अध्यायों में, तीन भागों में बाँटकर: अरम् (धर्म, 38 अध्याय), पोरुल् (अर्थ, राजनीति और धन, 70) और इन्बम् (काम, प्रेम, 25)। वे कहानियाँ सुनाने नहीं रुकते। हर कुरल एक बात कहकर रुक जाता है। पहला कुरल ‘अ’ अक्षर और ईश्वर से आरम्भ होता है: जैसे ‘अ’ सब अक्षरों में पहला है, वैसे ही आदि भगवान संसार में पहले हैं। तेरहवीं शताब्दी की परिमेलऴगर की टीका इसकी शास्त्रीय व्याख्या है।
02आज के वल्लुवर
परंपरा कहती है कि वे आज के चेन्नई के मयिलापुर के बुनकर थे, जिनकी पत्नी वासुकी पतिव्रता का आदर्श थीं, और वहाँ उनका मन्दिर है। उनका समय निश्चित नहीं; तमिलनाडु सरकार तिरुवल्लुवर संवत् 31 ई.पू. से गिनती है। जी. यू. पोप का अंग्रेज़ी अनुवाद 1886 में आया, और तब से कुरल दर्जनों भाषाओं में पहुँचा। 1 जनवरी 2000 को कन्याकुमारी में विवेकानन्द शिला स्मारक के पास की चट्टान पर प्रतिमा का अनावरण हुआ: 38 फ़ुट के आधार पर 95 फ़ुट की मूर्ति, अरम् के 38 अध्याय पोरुल् और इन्बम् के 95 अध्यायों को उठाए हुए।

“जैसे ‘अ’ सब अक्षरों में पहला है, वैसे ही आदि भगवान संसार में प्रथम हैं।”
Thirukkural 1