01चार पादों में योग
योगसूत्र ‘अथ योगानुशासनम्’ से आरम्भ होता है और अगले सूत्र में परिभाषा देता है: चित्त की वृत्तियों का निरोध योग है। चार पाद हैं: समाधि, साधन, विभूति और कैवल्य। दूसरे पाद में अष्टांग हैं: यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि। आसन पर केवल तीन सूत्र हैं; आसन स्थिर और सुखद हो। व्यास भाष्य सबसे पुरानी टीका है, और योग की हर बाद की परंपरा पतंजलि को उसी के माध्यम से पढ़ती है।
02पुष्यमित्र के समय के वैयाकरण
महाभाष्य पाणिनि के सूत्रों और कात्यायन के वार्तिकों पर टीका है। वर्तमान काल के उदाहरणों में उसमें ‘इह पुष्यमित्रं याजयामः’ आता है, यहाँ हम पुष्यमित्र का यज्ञ करा रहे हैं, और इसी से विद्वान उसके लेखक को पुष्यमित्र शुंग के समय में रखते हैं। परंपरा कहती है कि एक ही पतंजलि ने तीन उपहार दिए: चित्त के लिए योगसूत्र, वाणी के लिए महाभाष्य और शरीर के लिए वैद्यक ग्रन्थ। चिदम्बरम में उनकी पूजा सर्प-शरीर वाले आदिशेष के रूप में होती है, जो नटराज का नृत्य देखने उतरे थे।

“योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः।”
Yoga Sutra 1.2