01बालक राजा और उसकी माता
1305 में वढवाण में प्रबन्ध चिन्तामणि लिखने वाले जैन मुनि मेरुतुंग उन्हें कोंकण के कदम्ब राजा परमर्दी की पुत्री और अजयपाल की रानी बताते हैं। अजयपाल ने अणहिलपाटक, आज के पाटन, से केवल चार वर्ष राज किया और 1175 में मारे गए। उनके पुत्र मूलराज द्वितीय छोटे बालक थे, और भारत के सबसे समृद्ध राज्यों में से एक का शासन उनकी माता पर आ पड़ा। तीन वर्ष के भीतर मुल्तान और उच्छ ले चुके ग़ोरी सुल्तान मुहम्मद ने सोचा कि गुजरात भारत में घुसने का आसान रास्ता है।
02कासह्रद, 1178
मुहम्मद मरुस्थल पार कर आबू पर्वत की तलहटी तक आया। वहाँ कायद्रा गाँव के पास गुजरात की सेना ने उसका सामना किया, साथ में आबू के परमार धारावर्ष और नाडोल के चाहमान प्रमुख केल्हण और कीर्तिपाल। मेरुतुंग लिखते हैं कि रानी बालक को गोद में लेकर रणभूमि में उतरीं और म्लेच्छ राजा हारा। चाहमानों का सुन्धा पहाड़ी अभिलेख भी कासह्रद पर तुरुष्कों से केल्हण और कीर्तिपाल के युद्ध को याद करता है।
शत्रु का अपना इतिहासकार भी यही कहता है। मिन्हाज-उस-सिराज तबक़ात-ए-नासिरी में लिखता है कि नहरवाला का राय छोटा था पर उसके पास बड़ी सेना और हाथी थे, मुस्लिम सेना हारी और सुल्तान खाली हाथ लौटा।



