कासह्रद का युद्ध

विजेतागुजरात के चौलुक्य और सहयोगीबाल राजा मूलराज द्वितीय की ओर से राजमाता नायकी देवी; आबू के धारावर्ष परमार, नाडोल के केल्हण, कीर्तिपाल
1178 ई.बनाम
पक्षग़ोरीमुहम्मद ग़ोरी (शिहाबुद्दीन)

तराइन से तेरह वर्ष पहले मुहम्मद ग़ोरी ने गुजरात होकर भारत में घुसने का दक्षिणी मार्ग आज़माया। आबू पर्वत के नीचे एक बालक राजा के नाम पर उसकी माता नायकी देवी के नेतृत्व वाली सेना ने उसे खदेड़ दिया।

तिथि: 1178 ई.स्थान: कासह्रद (कायद्रा), आबू पर्वत की तलहटी, राजस्थानप्रकार: युद्ध
चित्र: Bourne & Shepherd · Public domain
परिणाम

मुहम्मद ग़ोरी बुरी तरह हारा और रेगिस्तान पार कर ग़ज़नी लौट गया।

01राजमाता की सेना

पिता अजयपाल की मृत्यु के बाद मूलराज द्वितीय बचपन में ही अणहिलवाड़ की गद्दी पर बैठे थे। मुल्तान और उच्च लेने के बाद मुहम्मद ग़ोरी 1178 में रेगिस्तान पार कर गुजरात पर चढ़ा। मेरुतुंग के अनुसार गोवा के कदम्ब राजा की पुत्री नायकी देवी अपने पुत्र को लेकर रणभूमि में उतरीं, और आबू के परमार तथा नाडोल के चाहमान उनके साथ आए। आबू के नीचे कासह्रद के दर्रे में, जहाँ पहाड़ियों ने ग़ोरी सेना का मोर्चा सँकरा कर दिया, दोनों सेनाएँ भिड़ीं। मेरुतुंग लिखते हैं कि रानी गोद में बालक को लेकर लड़ीं।

02दोनों पक्ष सहमत

दिल्ली के सुल्तानों के लिए लिखने वाला फ़ारसी इतिहासकार मिन्हाज-उस-सिराज साफ़ कहता है कि नहरवाला के राय के पास बहुत हाथी थे, इस्लाम की सेना हारी और भागी, और सुल्तान बिना उद्देश्य पूरा किए लौट गया। मेरुतुंग का प्रबन्ध चिन्तामणि विजय मूलराज के पक्ष को देता है, और गुजरात के अभिलेख बालक राजा की तुरुष्कों के स्वामी को हराने वाले के रूप में प्रशंसा करते हैं। मुहम्मद फिर कभी उस रास्ते नहीं आया; भारत पर उसका अगला प्रयास पंजाब होकर तराइन तक गया।

नायिका देवी
व्यक्तित्व · गुजरात की संरक्षिका, 1175–1178 ई.नायिका देवीगोवा की कदम्ब राजकुमारी और चौलुक्य राजा अजयपाल की विधवा नायिका देवी ने अपने छोटे पुत्र मूलराज द्वितीय के लिए गुजरात सँभाला। 1178 में उसके नाम से लड़ी गुजरात की सेना ने आबू पर्वत की तलहटी में कासह्रद पर मुहम्मद ग़ोरी को बुरी तरह हराया, और सुल्तान ने फिर कभी गुजरात का रास्ता नहीं लिया।पढ़ें →
महत्त्व

इसने ग़ोरियों के लिए गुजरात का रास्ता बन्द कर दिया और चौलुक्य राज्य को एक सदी और स्वतन्त्र रखा।