01प्रयाग, पत्रकारिता और कांग्रेस
उनका जन्म प्रयाग (इलाहाबाद) में मालवा से आए संस्कृत विद्वानों और कथावाचकों के परिवार में हुआ। उन्होंने विद्यालय में पढ़ाया, कालाकांकर में हिंदी दैनिक ‘हिंदुस्तान’ का संपादन किया, इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वकालत की, और 1907 में हिंदी साप्ताहिक ‘अभ्युदय’ तथा 1909 में अंग्रेज़ी दैनिक ‘द लीडर’ की स्थापना की। 1886 में वे कांग्रेस से जुड़े, 1909 और 1918 में अध्यक्ष चुने गए, और फिर 1932 तथा 1933 में भी, जब अध्यक्षता से पहले ही उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया। 1920 के दशक में उन्होंने हिंदू महासभा के अधिवेशनों की अध्यक्षता की और संयुक्त प्रांत की अदालतों में देवनागरी में हिंदी के प्रयोग के लिए काम किया।
02काशी हिंदू विश्वविद्यालय
उनका सबसे बड़ा कार्य काशी में ऐसा विश्वविद्यालय था जहाँ वेद और संस्कृत के साथ इंजीनियरिंग, चिकित्सा और विज्ञान पढ़ाए जाएँ। वे देश भर घूमे और राजाओं, व्यापारियों और साधारण परिवारों से धन माँगा; 1915 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय अधिनियम पारित हुआ और वायसराय लॉर्ड हार्डिंग ने वसंत पंचमी, 4 फ़रवरी 1916 को शिलान्यास किया। 1919 से 1938 तक मालवीयजी उसके कुलपति रहे, और विश्वनाथ मंदिर वाला उसका परिसर आज भी एशिया के सबसे बड़े आवासीय विश्वविद्यालयों में है। उन्होंने मुंडक उपनिषद के ‘सत्यमेव जयते’ को राष्ट्रीय सूत्र के रूप में लोकप्रिय बनाया। 12 नवंबर 1946 को काशी में उनका देहांत हुआ और 2015 में उन्हें भारत रत्न दिया गया।



