चित्र: Vijay Singh · CC BY-SA 4.0
शासक

हम्मीरदेव चौहान

रणथंभौर के चौहान राजा

शासन 1283–1301 ई.

रणथंभौर के अंतिम चौहान राजा ने 1291 में जलालुद्दीन खलजी को लौटाया, अलाउद्दीन खलजी को शरणागत मंगोल सरदार सौंपने से मना किया, और जुलाई 1301 में अपने दुर्ग की रक्षा करते हुए वीरगति पाई।

01चट्टान पर दुर्ग

रणथंभौर वनों और खड्डों से घिरी एक चपटी चोटी वाली पहाड़ी पर है, और पृथ्वीराज की दिल्ली गिरने के बाद से चौहान इसे थामे हुए थे। हम्मीर 1283 में गद्दी पर बैठे और मालवा तथा मेवाड़ तक धावे मारे। 1291 में जलालुद्दीन खलजी दुर्ग तक आया, उसकी प्राचीरें देखीं और दिल्ली लौट गया। बरनी के अनुसार उसने कहा कि ऐसे दस किलों के लिए भी वह अपने एक सैनिक का बाल न गँवाए। हम्मीर बिना लड़े जीत गए।

021301 की घेराबंदी

1299 के गुजरात अभियान के बाद अलाउद्दीन की सेना के मंगोल अफ़सरों ने विद्रोह किया और उनका नायक मुहम्मद शाह हम्मीर की शरण में आया। अलाउद्दीन ने उसे लौटाने को कहा। हम्मीर शरणागत को सौंपने को तैयार नहीं हुए। उलुग खाँ और नुसरत खाँ भेजे गए; प्राचीर से आए पत्थर से नुसरत खाँ मारा गया और स्वयं अलाउद्दीन घेरा कसने आया। शिविर में उपस्थित अमीर ख़ुसरो जुलाई 1301 में दुर्ग के पतन का उल्लेख करता है। नयचंद्र सूरि का ‘हम्मीर महाकाव्य’ बताता है कि अंतिम युद्ध से पहले रानी रंगदेवी और दुर्ग की स्त्रियों ने अग्नि में प्रवेश किया।

शाकम्भरी और अजमेर के चाहमान (चौहान)
राजवंश · लगभग सातवीं शताब्दी–1192 ई. (रणथम्भौर शाखा 1301 तक)शाकम्भरी और अजमेर के चाहमान (चौहान)चाहमान साँभर झील के आसपास के सरदारों से बढ़कर अजमेर और दिल्ली के राजा बने। पृथ्वीराज तृतीय ने 1191 में तराइन में मुहम्मद गोरी को हराया और 1192 में वहीं उससे हारे।पढ़ें →