उत्तरकाण्ड

अध्याय 92: राम की उपमा नहीं, वे भाव के वश

7 श्लोक · 92 में से 130

इस अध्याय में क्या होता है

राम की उपमा नहीं, वे भाव के वश

काकभुशुण्डि गरुड़ के सामने उपमाएँ पूरी करते हैं। प्रभु करोड़ों पातालों जैसे अगाध, करोड़ों हिमालयों जैसे अचल, करोड़ों कामधेनुओं जैसे सब कामना देने वाले हैं; करोड़ों ब्रह्मा जैसे सृष्टि करते, करोड़ों विष्णु जैसे पालते और करोड़ों रुद्र जैसे संहार करते हैं। उनका नाम पापों के समूह मिटाता है। फिर छन्द सब पलट देता है: वेद कहते हैं राम के समान कोई नहीं, ऐसी उपमा सूर्य को जुगनुओं के बराबर कहने जैसी है। फिर भी भाव के ग्राहक कृपालु प्रभु प्रेम से गाई स्तुति से प्रसन्न होते हैं। भुशुण्डि कहते हैं, जो सन्तों से सुना वही सुनाया। इसलिए ममता, मद और मान छोड़कर सीतापति को भजो।

92.1

प्रभु अगाध सत कोटि पताला । समन कोटि सत सरिस कराला ॥
तीरथ अमित कोटि सम पावन । नाम अखिल अघ पूग नसावन ॥

prabhu agādha sata koṭi patālā | samana koṭi sata sarisa karālā ||
tīratha amita koṭi sama pāvana | nāma akhila agha pūga nasāvana ||

92.2

हिमगिरि कोटि अचल रघुबीरा । सिन्धु कोटि सत सम गम्भीरा ॥
कामधेनु सत कोटि समाना । सकल काम दायक भगवाना ॥

himagiri koṭi acala raghubīrā | sindhu koṭi sata sama gambhīrā ||
kāmadhenu sata koṭi samānā | sakala kāma dāyaka bhagavānā ||

92.3

सारद कोटि अमित चतुराई । विधि सत कोटि सृष्टि निपुनाई ॥
बिष्नु कोटि सम पालन कर्ता । रुद्र कोटि सत सम संहर्ता ॥

sārada koṭi amita caturāī | vidhi sata koṭi sṛṣṭi nipunāī ||
biṣnu koṭi sama pālana kartā | rudra koṭi sata sama saṃhartā ||

92.4

धनद कोटि सत सम धनवाना । माया कोटि प्रपञ्च निधाना ॥
भार धरन सत कोटि अहीसा । निरवधि निरुपम प्रभु जगदीसा ॥

dhanada koṭi sata sama dhanavānā | māyā koṭi prapañca nidhānā ||
bhāra dharana sata koṭi ahīsā | niravadhi nirupama prabhu jagadīsā ||

92.छं॰ 1छन्द

निरुपम न उपमा आन राम समान राम निगम कहै ।
जिमि कोटि सत खद्योत सम रबि, कहत अति लघुता लहै ॥
एहि भाँति निज निज मति-बिलास मुनिस हरिहि बखानहीं ।
प्रभु भाव गाहक अति कृपाल सप्रेम सुनि सचु पावहीं ॥

nirupama na upamā āna rāma samāna rāma nigama kahai |
jimi koṭi sata khadyota sama rabi, kahata ati laghutā lahai ||
ehi bhām̐ti nija nija mati-bilāsa munisa harihi bakhānahīṃ |
prabhu bhāva gāhaka ati kṛpāla saprema suni sacu pāvahīṃ ||

दो॰ 92 (क)दोहा

राम अमित गुन सागर, थाह कि पावइ कोइ ।
सन्तन्ह सन जस कछु सुनेउँ, तुम्हहिं सुनायउँ सोइ ॥

rāma amita guna sāgara, thāha ki pāvai koi |
santanha sana jasa kachu suneum̐, tumhahiṃ sunāyaum̐ soi ||

92.सो॰ 92 (ख)सोरठा

भाव बस्य भगवान, सुख निधान करुना भवन ।
तजि ममता मद मान, भजिअ सदा सीता रवन ॥

bhāva basya bhagavāna, sukha nidhāna karunā bhavana |
taji mamatā mada māna, bhajia sadā sītā ravana ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0