उत्तरकाण्ड

अध्याय 91: हर माप से परे श्रीराम की महिमा

6 श्लोक · 91 में से 130

इस अध्याय में क्या होता है

हर माप से परे श्रीराम की महिमा

काकभुशुण्डि गरुड़ से कहते हैं कि उन्होंने प्रभु का प्रताप अपनी बुद्धि भर गाया है, कोई युक्ति नहीं जोड़ी; सब अपनी आँखों से देखा है। रघुनाथ के नाम, रूप और गुण अनन्त हैं। मुनि अपनी-अपनी मति से गाते हैं, फिर भी वेद, शेष और शिव पार नहीं पाते। गरुड़ से मच्छर तक सब पक्षी आकाश में उड़ते हैं, पर कोई अन्त नहीं पाता। फिर उपमाएँ आती हैं, सौ-सौ करोड़ गुनी। श्रीराम सौ करोड़ कामदेवों से सुन्दर हैं, अनगिनत दुर्गाओं की भाँति शत्रु-मर्दन करते हैं; बल में सौ करोड़ पवन, प्रकाश में सौ करोड़ सूर्य, शीतलता में सौ करोड़ चन्द्रमा, और काल के समान दुर्जय हैं।

91.1

निज मति सरिस नाथ मैं गाई । प्रभु प्रताप महिमा खगराई ॥
कहेउँ न कछु करि जुगुति बिसेखी । यह सब मैं निज नयनन्हि देखी ॥

nija mati sarisa nātha maiṃ gāī | prabhu pratāpa mahimā khagarāī ||
kaheum̐ na kachu kari juguti bisekhī | yaha saba maiṃ nija nayananhi dekhī ||

91.2

महिमा नाम रूप गुन गाथा । सकल अमित अनन्त रघुनाथा ॥
निज निज मति मुनि हरि गुन गावहिँ । निगम सेष सिव पार न पावहिँ ॥

mahimā nāma rūpa guna gāthā | sakala amita ananta raghunāthā ||
nija nija mati muni hari guna gāvahim̐ | nigama seṣa siva pāra na pāvahim̐ ||

91.3

तुम्हहिँ आदि खग मसक प्रजन्ता । नभ उड़ाहिं नहिं पावहिँ अन्ता ॥
तिमि रघुपति महिमा अवगाहा । तात कबहुँ कोउ पाव कि थाहा ॥

tumhahim̐ ādi khaga masaka prajantā | nabha ur̤āhiṃ nahiṃ pāvahim̐ antā ||
timi raghupati mahimā avagāhā | tāta kabahum̐ kou pāva ki thāhā ||

91.4

राम काम सत कोटि सुभग तन । दुर्गा कोटि अमित अरि मर्दन ॥
सक्र कोटि सत सरिस बिलासा । नभ सत कोटि अमित अवकासा ॥

rāma kāma sata koṭi subhaga tana | durgā koṭi amita ari mardana ||
sakra koṭi sata sarisa bilāsā | nabha sata koṭi amita avakāsā ||

दो॰ 91 (क)दोहा

मरुत कोटि सत बिपुल बल, रबि सत कोटि प्रकास ।
ससि सत कोटि सुसीतल, समन सकल भव त्रास ॥

maruta koṭi sata bipula bala, rabi sata koṭi prakāsa |
sasi sata koṭi susītala, samana sakala bhava trāsa ||

दो॰ 91 (ख)दोहा

काल कोटि सत सरिस-अति, दुस्तर दुर्ग दुरन्त ।
धूमकेतु सत कोटि सम, दुराधरष भगवन्त ॥

kāla koṭi sata sarisa-ati, dustara durga duranta |
dhūmaketu sata koṭi sama, durādharaṣa bhagavanta ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0