इस अध्याय में क्या होता है माया से मुक्त भुशुण्डि का निज अनुभव काकभुशुण्डि गरुड़ से कहते हैं कि वे कुछ समय अवध में रहकर बालक श्रीराम का विनोद देखते रहे, भक्ति का वर पाया, और वन्दना कर अपने आश्रम लौटे। जब से रघुनायक ने उन्हें अपनाया, माया ने कभी नहीं घेरा। अब वे अपना अनुभव कहते हैं। हरि-भजन बिना क्लेश नहीं जाते। राम की कृपा बिना उनकी प्रभुता कोई नहीं जानता; जाने बिना विश्वास नहीं, विश्वास बिना प्रीति नहीं, और प्रीति बिना भक्ति दृढ़ नहीं होती, जैसे जल पर चिकनाई नहीं ठहरती। गुरु बिना ज्ञान, ज्ञान बिना वैराग्य, सन्तोष बिना विश्राम कहाँ? जल बिना नाव नहीं चलती, चाहे कोई करोड़ यत्न करके मर जाए।
89.1 मैं पुनि अवध रहेउँ कछु काला । देखेउँ बाल-बिनोद रसाला ॥ राम प्रसाद भगति बर पायउँ । प्रभु पद बन्दि निजाश्रम आयउँ ॥
maiṃ puni avadha raheum̐ kachu kālā | dekheum̐ bāla-binoda rasālā || rāma prasāda bhagati bara pāyaum̐ | prabhu pada bandi nijāśrama āyaum̐ ||
89.2 तब ते मोहि न ब्यापी माया । जब ते रघुनायक अपनाया ॥ यह सब गुप्त चरित मैं गावा । हरि मायाँ जिमि मोहि नचावा ॥
taba te mohi na byāpī māyā | jaba te raghunāyaka apanāyā || yaha saba gupta carita maiṃ gāvā | hari māyām̐ jimi mohi nacāvā ||
89.3 निज अनुभव अब कहउँ खगेसा । बिनु हरि भजन न जाहिँ कलेसा ॥ राम कृपा बिनु सुनु खगराई । जानि न जाइ राम प्रभुताई ॥
nija anubhava aba kahaum̐ khagesā | binu hari bhajana na jāhim̐ kalesā || rāma kṛpā binu sunu khagarāī | jāni na jāi rāma prabhutāī ||
89.4 जानें बिनु न होइ परतीती । बिनु परतीति होइ नहिं प्रीती ॥ प्रीति बिना नहिँ भगति दिढ़ाई । जिमि खगेस जल के चिकनाई ॥
jāneṃ binu na hoi paratītī | binu paratīti hoi nahiṃ prītī || prīti binā nahim̐ bhagati dir̤hāī | jimi khagesa jala ke cikanāī ||
89.सो॰ 89 (क) सोरठा बिनु गुरु होइ कि ज्ञान, ज्ञान कि होइ बिराग बिनु । गावहिँ बेद पुरान, सुख कि लहिअ हरि भगति बिनु ॥
binu guru hoi ki jñāna, jñāna ki hoi birāga binu | gāvahim̐ beda purāna, sukha ki lahia hari bhagati binu ||
दो॰ 89 (ख) दोहा कोउ बिश्राम कि पाव तात सहज सन्तोष बिनु । चला कि जल बिनु नाव, कोटि जतन पचि पचि मरिअ ॥
kou biśrāma ki pāva tāta sahaja santoṣa binu | calā ki jala binu nāva, koṭi jatana paci paci maria ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0
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