उत्तरकाण्ड

अध्याय 81: हर ब्रह्माण्ड में वही बालक राम

6 श्लोक · 81 में से 130

इस अध्याय में क्या होता है

हर ब्रह्माण्ड में वही बालक राम

भुशुण्डि गरुड़ से कहते हैं, हर लोक में भिन्न ब्रह्मा, भिन्न विष्णु, शिव, मनु और दिक्पाल थे; सब जीव, पृथ्वी, नदियाँ और पर्वत वहाँ और ही प्रकार के थे। हर ब्रह्माण्ड में मैंने अपना रूप भी देखा और अनेक अनुपम वस्तुएँ। हर भुवन में अवधपुरी, सरयू और भिन्न-भिन्न नर-नारी देखे; दशरथ, कौसल्या और भरत आदि भाई अनेक रूपों में। हर ब्रह्माण्ड में राम का अवतार और उनका उदार बाल-विनोद देखा। सब कुछ भिन्न था, पर अनगिनत भुवनों में घूमकर भी दूसरे राम नहीं देखे: वही बचपन, वही शोभा, वही कृपालु रघुवीर। मोह की हवा से प्रेरित मैं भुवन-भुवन देखता फिरा।

81.1

लोक लोक प्रति भिन्न बिधाता । भिन्न बिष्नु सिव मनु दिसि त्राता ॥
नर गन्धर्व भूत बेताला । किन्नर निसिचर पसु खग ब्याला ॥

loka loka prati bhinna bidhātā | bhinna biṣnu siva manu disi trātā ||
nara gandharva bhūta betālā | kinnara nisicara pasu khaga byālā ||

81.2

देव दनुज गन नाना जाती । सकल जीव तहँ आनहिँ भाँती ॥
महि सरि सागर सर गिरि नाना । सब प्रपञ्च तहँ आनहिँ आना ॥

deva danuja gana nānā jātī | sakala jīva taham̐ ānahim̐ bhām̐tī ||
mahi sari sāgara sara giri nānā | saba prapañca taham̐ ānahim̐ ānā ||

81.3

अंडकोस प्रति प्रति निज रूपा । देखेउँ जिनस अनेक अनूपा ॥
अवधपुरी प्रति भुवन निहारी । सरजू भिन्न भिन्न नर नारी ॥

aṃḍakosa prati prati nija rūpā | dekheum̐ jinasa aneka anūpā ||
avadhapurī prati bhuvana nihārī | sarajū bhinna bhinna nara nārī ||

81.4

दसरथ कौसल्या सुनु ताता । विविध रूप भरतादिक भ्राता ॥
प्रति ब्रह्मांड राम अवतारा । देखउँ बालबिनोद उदारा ॥

dasaratha kausalyā sunu tātā | vividha rūpa bharatādika bhrātā ||
prati brahmāṃḍa rāma avatārā | dekhaum̐ bālabinoda udārā ||

दो॰ 81 (क)दोहा

भिन्न भिन्न में दीख सबु, अति बिचित्र हरिजान ।
अगनित भुवन फिरेउँ प्रभु, राम न देखेउँ आन ॥

bhinna bhinna meṃ dīkha sabu, ati bicitra harijāna |
aganita bhuvana phireum̐ prabhu, rāma na dekheum̐ āna ||

दो॰ 81 (ख)दोहा

सोइ सिसुपन सोइ सोभा, सोइ कृपाल रघुबीर ।
भुवन भुवन देखत फिरउँ, प्रेरित मोह समीर ॥

soi sisupana soi sobhā, soi kṛpāla raghubīra |
bhuvana bhuvana dekhata phiraum̐, prerita moha samīra ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0