इस अध्याय में क्या होता है हर ब्रह्माण्ड में वही बालक राम भुशुण्डि गरुड़ से कहते हैं, हर लोक में भिन्न ब्रह्मा, भिन्न विष्णु, शिव, मनु और दिक्पाल थे; सब जीव, पृथ्वी, नदियाँ और पर्वत वहाँ और ही प्रकार के थे। हर ब्रह्माण्ड में मैंने अपना रूप भी देखा और अनेक अनुपम वस्तुएँ। हर भुवन में अवधपुरी, सरयू और भिन्न-भिन्न नर-नारी देखे; दशरथ, कौसल्या और भरत आदि भाई अनेक रूपों में। हर ब्रह्माण्ड में राम का अवतार और उनका उदार बाल-विनोद देखा। सब कुछ भिन्न था, पर अनगिनत भुवनों में घूमकर भी दूसरे राम नहीं देखे: वही बचपन, वही शोभा, वही कृपालु रघुवीर। मोह की हवा से प्रेरित मैं भुवन-भुवन देखता फिरा।
81.1 लोक लोक प्रति भिन्न बिधाता । भिन्न बिष्नु सिव मनु दिसि त्राता ॥ नर गन्धर्व भूत बेताला । किन्नर निसिचर पसु खग ब्याला ॥
loka loka prati bhinna bidhātā | bhinna biṣnu siva manu disi trātā || nara gandharva bhūta betālā | kinnara nisicara pasu khaga byālā ||
81.2 देव दनुज गन नाना जाती । सकल जीव तहँ आनहिँ भाँती ॥ महि सरि सागर सर गिरि नाना । सब प्रपञ्च तहँ आनहिँ आना ॥
deva danuja gana nānā jātī | sakala jīva taham̐ ānahim̐ bhām̐tī || mahi sari sāgara sara giri nānā | saba prapañca taham̐ ānahim̐ ānā ||
81.3 अंडकोस प्रति प्रति निज रूपा । देखेउँ जिनस अनेक अनूपा ॥ अवधपुरी प्रति भुवन निहारी । सरजू भिन्न भिन्न नर नारी ॥
aṃḍakosa prati prati nija rūpā | dekheum̐ jinasa aneka anūpā || avadhapurī prati bhuvana nihārī | sarajū bhinna bhinna nara nārī ||
81.4 दसरथ कौसल्या सुनु ताता । विविध रूप भरतादिक भ्राता ॥ प्रति ब्रह्मांड राम अवतारा । देखउँ बालबिनोद उदारा ॥
dasaratha kausalyā sunu tātā | vividha rūpa bharatādika bhrātā || prati brahmāṃḍa rāma avatārā | dekhaum̐ bālabinoda udārā ||
दो॰ 81 (क) दोहा भिन्न भिन्न में दीख सबु, अति बिचित्र हरिजान । अगनित भुवन फिरेउँ प्रभु, राम न देखेउँ आन ॥
bhinna bhinna meṃ dīkha sabu, ati bicitra harijāna | aganita bhuvana phireum̐ prabhu, rāma na dekheum̐ āna ||
दो॰ 81 (ख) दोहा सोइ सिसुपन सोइ सोभा, सोइ कृपाल रघुबीर । भुवन भुवन देखत फिरउँ, प्रेरित मोह समीर ॥
soi sisupana soi sobhā, soi kṛpāla raghubīra | bhuvana bhuvana dekhata phiraum̐, prerita moha samīra ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0
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