उत्तरकाण्ड

अध्याय 80: श्रीराम के उदर में अनगिनत ब्रह्माण्ड

6 श्लोक · 80 में से 130

इस अध्याय में क्या होता है

श्रीराम के उदर में अनगिनत ब्रह्माण्ड

भयभीत होकर भुशुण्डि ने आँखें मूँद लीं, फिर खोलीं तो कोसलपुर में था। मुझे देखकर राम मुस्कुराए, और उनके हँसते ही मैं तुरन्त उनके मुख में चला गया। हे पक्षिराज, भुशुण्डि कहते हैं, पेट के भीतर मैंने बहुत-से ब्रह्माण्डों के समूह देखे, एक से एक विचित्र लोक। करोड़ों चतुरानन ब्रह्मा और गौरीपति शिव, अनगिनत तारे, सूर्य और चन्द्रमा; अनगिनत यम, पर्वत, समुद्र और वन; देवता, मुनि, सिद्ध, नाग, मनुष्य, किन्नर और चारों प्रकार के चर-अचर जीव। जो न कभी देखा था, न सुना, जो मन में भी नहीं समाता, वह सब अद्भुत वहाँ देखा; उसका वर्णन कैसे हो? एक-एक ब्रह्माण्ड में मैं सौ-सौ वर्ष रहा, और इस तरह अनेक ब्रह्माण्ड देखता फिरा।

80.1

मूदेउँ नयन त्रसित जब भयउँ । पुनि चितवत कोसलपुर गयऊँ ॥
मोहि बिलोकि राम मुसुकाहीँ । बिहँसत तुरत गयउँ मुख माहीँ ॥

mūdeum̐ nayana trasita jaba bhayaum̐ | puni citavata kosalapura gayaūm̐ ||
mohi biloki rāma musukāhīm̐ | biham̐sata turata gayaum̐ mukha māhīm̐ ||

80.2

उदर माँझ सुनु अंडज राया । देखउं बहु ब्रह्मांड निकाया ॥
अति विचित्र तहँ लोक अनेका । रचना अधिक एक ते एका ॥

udara mām̐jha sunu aṃḍaja rāyā | dekhauṃ bahu brahmāṃḍa nikāyā ||
ati vicitra taham̐ loka anekā | racanā adhika eka te ekā ||

80.3

कोटिन्ह चतुरानन गौरीसा । अगनित उडुगन रवि रजनीसा ॥
अगनित लोकपाल जम काला । अगनित भूधर भूमि बिसाला ॥

koṭinha caturānana gaurīsā | aganita uḍugana ravi rajanīsā ||
aganita lokapāla jama kālā | aganita bhūdhara bhūmi bisālā ||

80.4

सागर सरि सर बिपिन अपारा । नाना भाँति सृष्टि बिस्तारा ॥
सुर मुनि सिद्ध नाग नर किन्नर । चारि प्रकार जीव सचराचर ॥

sāgara sari sara bipina apārā | nānā bhām̐ti sṛṣṭi bistārā ||
sura muni siddha nāga nara kinnara | cāri prakāra jīva sacarācara ||

दो॰ 80 (क)दोहा

जो नहिँ देखा नहिँ सुना, जो मनहूँ न समाइ ।
सो सब अद्‍भुत देखेउँ, बरनि कवनि बिधि जाइ ॥

jo nahim̐ dekhā nahim̐ sunā, jo manahūm̐ na samāi |
so saba ad‍bhuta dekheum̐, barani kavani bidhi jāi ||

दो॰ 80 (ख)दोहा

एक एक ब्रह्मांड महँ, रहउँ बरष सत एक ।
एहि बिधि देखत फिरउँ मैं, अंड कटाह अनेक ॥

eka eka brahmāṃḍa maham̐, rahaum̐ baraṣa sata eka |
ehi bidhi dekhata phiraum̐ maiṃ, aṃḍa kaṭāha aneka ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0