अरुन पानि नख करज मनोहर । बाहु बिसाल बिभूषन सुन्दर ॥
कन्ध बाल केहरि दर ग्रीवाँ । चारु चिबुक आनन छबि सींवा ॥
aruna pāni nakha karaja manohara | bāhu bisāla bibhūṣana sundara ||
kandha bāla kehari dara grīvām̐ | cāru cibuka ānana chabi sīṃvā ||
7 श्लोक · 77 में से 130
भुशुण्डि गरुड़ से बालक का रूप बताते हैं: लाल हथेलियाँ, लम्बी भुजाएँ, सिंह-शावक जैसे कन्धे, शंख-सी गर्दन, तोतली बोली, ऊपर-नीचे दो-दो नन्हे दाँत, चाँदनी-सी हँसी, भव से छुड़ाने वाले कमल-नेत्र, गोरोचन का तिलक, घुँघराले काले बाल और पीली झीनी झँगुली। रूप की राशि प्रभु आँगन में अपनी परछाईं देखकर नाचते हैं और कौए से तरह-तरह खेलते हैं, जिसे कहते भुशुण्डि को लाज आती है। किलकारी भरकर वे पकड़ने दौड़ते हैं; कौआ भागता है तो पुआ दिखाते हैं। पास आने पर प्रभु हँसते हैं, भाग जाने पर रोने लगते हैं। साधारण शिशु जैसी यह लीला देखकर भुशुण्डि को मोह हो गया: चिदानन्दघन प्रभु यह कैसा चरित कर रहे हैं?
अरुन पानि नख करज मनोहर । बाहु बिसाल बिभूषन सुन्दर ॥
कन्ध बाल केहरि दर ग्रीवाँ । चारु चिबुक आनन छबि सींवा ॥
aruna pāni nakha karaja manohara | bāhu bisāla bibhūṣana sundara ||
kandha bāla kehari dara grīvām̐ | cāru cibuka ānana chabi sīṃvā ||
कलबल बचन अधर अरुनारे । दुइ दुइ दसन बिसद बर बारे ॥
ललित, कपोल मनोहर नासा । सकल सुखद ससि कर सम हासा ॥
kalabala bacana adhara arunāre | dui dui dasana bisada bara bāre ||
lalita, kapola manohara nāsā | sakala sukhada sasi kara sama hāsā ||
नील कञ्ज लोचन भव मोचन । भ्राजत भाल तिलक गोरोचन ॥
बिकट भृकुटि सम श्रवन सुहाये । कुञ्चित कच मेचक छवि छाये ॥
nīla kañja locana bhava mocana | bhrājata bhāla tilaka gorocana ||
bikaṭa bhṛkuṭi sama śravana suhāye | kuñcita kaca mecaka chavi chāye ||
पीत झीनि झगुली तन सोही । किलकनि चितवनि भावति मोही ॥
रूप रासि नृप अजिर बिहारी । नाचहिँ निज प्रतिबिम्ब निहारी ॥
pīta jhīni jhagulī tana sohī | kilakani citavani bhāvati mohī ||
rūpa rāsi nṛpa ajira bihārī | nācahim̐ nija pratibimba nihārī ||
मोहि सन करहीँ बिबिध बिधि क्रीड़ा । बरनत मोहि होति अति ब्रीड़ा ॥
किलकत मोहि धरन जन धावहिँ । चलउँ भागि तम पूप देखावहिँ ॥
mohi sana karahīm̐ bibidha bidhi krīr̤ā | baranata mohi hoti ati brīr̤ā ||
kilakata mohi dharana jana dhāvahim̐ | calaum̐ bhāgi tama pūpa dekhāvahim̐ ||
आवत निकट हँसहिँ प्रभु, भाजत रुदन कराहिँ ।
जाउँ समीप गहन पद, फिरि फिरि चितइ पराहिं ॥
āvata nikaṭa ham̐sahim̐ prabhu, bhājata rudana karāhim̐ |
jāum̐ samīpa gahana pada, phiri phiri citai parāhiṃ ||
प्राकृत सिसु इव लीला, देखि भयउ मोहि मोह ।
कवन चरित्र करत प्रभु, चिदानन्द सन्दोह ॥
prākṛta sisu iva līlā, dekhi bhayau mohi moha |
kavana caritra karata prabhu, cidānanda sandoha ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0