उत्तरकाण्ड

अध्याय 76: राजमहल का आँगन और बालक राम की छवि

5 श्लोक · 76 में से 130

इस अध्याय में क्या होता है

राजमहल का आँगन और बालक राम की छवि

भुशुण्डि पक्षिराज से कहते हैं: सेवकों को सुख देने वाला राम-चरित सुनिए। राजा का महल सब प्रकार से सुन्दर है, सोने और अनेक प्रकार की मणियों से जड़ा। उसके मनोहर आँगन का वर्णन नहीं हो सकता, जहाँ चारों भाई नित्य खेलते हैं। वहाँ माताओं को सुख देते हुए रघुराई बाल-विनोद करते आँगन में विचरते हैं। उनका कोमल शरीर मरकत मणि-सा श्याम है, अंग-अंग में अनेक कामदेवों की छवि है। चरण नए लाल कमल-से कोमल हैं, नख चन्द्रमा से उजले। तलवों में वज्र आदि चार सुन्दर चिह्न हैं, पैरों में मधुर ध्वनि करते नूपुर हैं, और कमर में सोने-मणि की बनी सुन्दर करधनी बजती है। सुन्दर पेट पर तीन रेखाएँ हैं, नाभि गहरी है, और चौड़ी छाती पर बच्चों के अनेक गहने और वस्त्र शोभा देते हैं।

76.1

कहइ भसुंड सुनहु खगनायक । रामचरित सेवक सुखदायक ॥
नृप मन्दिर सुन्दर सब भाँती । खचित कनक मनि नाना जाती ॥

kahai bhasuṃḍa sunahu khaganāyaka | rāmacarita sevaka sukhadāyaka ||
nṛpa mandira sundara saba bhām̐tī | khacita kanaka mani nānā jātī ||

76.2

बरनि न जाइ रुचिर अँगनाई । जहँ खेलहिं नित चारिउ भाई ॥
बाल-बिनोद करत रघुराई । बिचरत अजिर जननि सुखदाई ॥

barani na jāi rucira am̐ganāī | jaham̐ khelahiṃ nita cāriu bhāī ||
bāla-binoda karata raghurāī | bicarata ajira janani sukhadāī ||

76.3

मरकत मृदुल कलेवर-स्यामा । अङ्ग अङ्ग प्रति छबि बहु कामा ॥
नव राजीव अरुन मृदु चरना । पदज रुचिर नख ससि दुति हरना ॥

marakata mṛdula kalevara-syāmā | aṅga aṅga prati chabi bahu kāmā ||
nava rājīva aruna mṛdu caranā | padaja rucira nakha sasi duti haranā ||

76.4

ललित अङ्क कुलिसादिक चारी । नूपुर चारू मधुर रव कारी ॥
चारु पुरट मनि रचित बनाई । कटि किंकिन कल मुखर सुहाई ॥

lalita aṅka kulisādika cārī | nūpura cārū madhura rava kārī ||
cāru puraṭa mani racita banāī | kaṭi kiṃkina kala mukhara suhāī ||

दो॰ 76दोहा

दो रेखा त्रय सुन्दर उदर, नाभी रुचिर गम्भीर ।
उर आयत भ्राजत विविध, बाल-बिभूषन चीर ॥

do rekhā traya sundara udara, nābhī rucira gambhīra |
ura āyata bhrājata vividha, bāla-bibhūṣana cīra ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0