एतना मन आनत खगराया । रघुपति प्रेरित ब्यापी माया ॥
सो माया न दुखद मोहि काहीं । आन जीव इव संसृत नाहीं ॥
etanā mana ānata khagarāyā | raghupati prerita byāpī māyā ||
so māyā na dukhada mohi kāhīṃ | āna jīva iva saṃsṛta nāhīṃ ||
6 श्लोक · 78 में से 130
भुशुण्डि गरुड़ से कहते हैं, इतना मन में लाते ही रघुपति की प्रेरी माया मुझ पर छा गई। पर उसने मुझे दूसरों की तरह नहीं बाँधा, इसका कारण सुनिए। अखण्ड ज्ञान केवल सीतापति में है; चर-अचर सब जीव माया के वश हैं। यदि सबमें एकरस ज्ञान होता, तो ईश्वर और जीव में भेद कैसा? अभिमानी जीव माया के वश है, और गुणों की खान माया ईश्वर के वश। माया का किया भेद मिथ्या है, फिर भी हरि के बिना करोड़ उपायों से नहीं जाता। जो रामचन्द्र के भजन बिना मोक्ष चाहता है, वह ज्ञानी होकर भी बिना पूँछ-सींग का पशु है। सोलह चन्द्रमा उगें और सब पर्वतों में आग लगे, तो भी सूर्य बिना रात नहीं जाती।
एतना मन आनत खगराया । रघुपति प्रेरित ब्यापी माया ॥
सो माया न दुखद मोहि काहीं । आन जीव इव संसृत नाहीं ॥
etanā mana ānata khagarāyā | raghupati prerita byāpī māyā ||
so māyā na dukhada mohi kāhīṃ | āna jīva iva saṃsṛta nāhīṃ ||
नाथ इहाँ कछु कारन आना । सुनहु सो सावधान हरिजाना ॥
ज्ञान अखंड एक सीताबर । माया बस्य जीव सचराचर ॥
nātha ihām̐ kachu kārana ānā | sunahu so sāvadhāna harijānā ||
jñāna akhaṃḍa eka sītābara | māyā basya jīva sacarācara ||
जौँ सब कें रह ज्ञान एकरस । ईस्वर जीवहि भेद कहहु कस ॥
माया बस्य जीव अभिमानी । ईस बस्य माया गुन खानी ॥
jaum̐ saba keṃ raha jñāna ekarasa | īsvara jīvahi bheda kahahu kasa ||
māyā basya jīva abhimānī | īsa basya māyā guna khānī ||
परबस जीव स्वबस भगवन्ता । जीव अनेक एक श्रीकन्ता ॥
मुधा भेद जद्यपि कृत माया । बिनु हरि जाइ न कोटि उपाया ॥
parabasa jīva svabasa bhagavantā | jīva aneka eka śrīkantā ||
mudhā bheda jadyapi kṛta māyā | binu hari jāi na koṭi upāyā ||
रामचन्द्र के भजन बिनु, जो चह पद निर्बान ।
ज्ञानबन्त अपि सो नर, पसु बिनु पूँछ बिषान ॥
rāmacandra ke bhajana binu, jo caha pada nirbāna |
jñānabanta api so nara, pasu binu pūm̐cha biṣāna ||
राकापति षोड़स उअहिं, तारागन समुदाइ ।
सकल गिरिन्ह दव लाइअ, बिनु रबि राति न जाई ॥
rākāpati ṣor̤asa uahiṃ, tārāgana samudāi |
sakala girinha dava lāia, binu rabi rāti na jāī ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0