गुन कृत सन्यपात नहिँ केही । कोउ न मान मद तजेउ निबेही ॥
जोबन ज्वर केहि नहिँ बलकावा । ममता केहि कर जल न नसावा ॥
guna kṛta sanyapāta nahim̐ kehī | kou na māna mada tajeu nibehī ||
jobana jvara kehi nahim̐ balakāvā | mamatā kehi kara jala na nasāvā ||
6 श्लोक · 71 में से 130
भुशुण्डि गरुड़ से आगे गिनाते हैं। गुणों के सन्निपात ने किसे नहीं घेरा? मान और मद किसने छोड़ा? यौवन के ज्वर ने किसे नहीं बहकाया, ममता ने किसका यश नहीं नष्ट किया? चिन्ता रूपी साँपिन ने किसे नहीं डँसा? पुत्र, धन और लोक की तीन एषणाओं ने किसकी बुद्धि मलिन नहीं की? यह सब माया का परिवार है, प्रबल और अपार; शिव और ब्रह्मा भी इससे डरते हैं? माया की प्रचण्ड सेना संसार में छाई है, काम आदि सेनापति हैं और दम्भ, कपट, पाखण्ड योद्धा। वह माया रघुवीर की दासी है, समझ लेने पर मिथ्या है, फिर भी राम-कृपा बिना नहीं छूटती; भुशुण्डि यह दृढ़ता से कहते हैं।
गुन कृत सन्यपात नहिँ केही । कोउ न मान मद तजेउ निबेही ॥
जोबन ज्वर केहि नहिँ बलकावा । ममता केहि कर जल न नसावा ॥
guna kṛta sanyapāta nahim̐ kehī | kou na māna mada tajeu nibehī ||
jobana jvara kehi nahim̐ balakāvā | mamatā kehi kara jala na nasāvā ||
मच्छर काहि कलङ्क न लावा । काहि न सोक समीर डोलावा ॥
चिन्ता साँपिनि को नहिं खाया । को जग जाहि न ब्यापी माया ॥
macchara kāhi kalaṅka na lāvā | kāhi na soka samīra ḍolāvā ||
cintā sām̐pini ko nahiṃ khāyā | ko jaga jāhi na byāpī māyā ||
कीट मनोरथ दारु सरीरा । जेहि न लाग घुन को अस धीरा ॥
सुत वित लोक ईषना तीनी । केहि कै मति इन्ह कृत न मलीनी ॥
kīṭa manoratha dāru sarīrā | jehi na lāga ghuna ko asa dhīrā ||
suta vita loka īṣanā tīnī | kehi kai mati inha kṛta na malīnī ||
यह सब माया कर परिवारा । प्रबल अमिति को बरनै पारा ॥
सिव चतुरानन जाहि डेराहीं । अपर जीव केहि लेखे माहीं ॥
yaha saba māyā kara parivārā | prabala amiti ko baranai pārā ||
siva caturānana jāhi ḍerāhīṃ | apara jīva kehi lekhe māhīṃ ||
ब्यापि रहेउ संसार मह, माया कटक प्रचंड ।
सेनापति कामादि भट, दम्भ कपट पाषंड ॥
byāpi raheu saṃsāra maha, māyā kaṭaka pracaṃḍa |
senāpati kāmādi bhaṭa, dambha kapaṭa pāṣaṃḍa ||
सो दासी रघुबीर के, समुझें मिथ्या सोपि ।
छूट न राम कृपा बिनु, नाथ कहउँ पद रोपि ॥
so dāsī raghubīra ke, samujheṃ mithyā sopi |
chūṭa na rāma kṛpā binu, nātha kahaum̐ pada ropi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0