उत्तरकाण्ड

अध्याय 59: व्याकुल गरुड़ को नारद ब्रह्मा के पास भेजते हैं

5 श्लोक · 59 में से 130

इस अध्याय में क्या होता है

व्याकुल गरुड़ को नारद ब्रह्मा के पास भेजते हैं

गरुड़ ने तरह-तरह से मन को समझाया, पर ज्ञान प्रकट नहीं हुआ और हृदय में भ्रम छा गया। भगवान शिव उमा से कहते हैं, वे तुम्हारी ही भाँति मोह के वश हो गए। व्याकुल होकर वे देवर्षि नारद के पास गए और मन का संशय कह सुनाया। सुनकर नारद को बड़ी दया आई। हे खग, श्रीराम की माया प्रबल है, वे बोले; वह ज्ञानियों का भी चित्त हर लेती है। जिसने मुझे बहुत बार नचाया, वही माया हे पक्षिराज, तुम पर छा गई है। तुम्हारे हृदय में महामोह उपजा है, मेरे कहने से जल्दी नहीं मिटेगा। हे खगेश, चतुरानन ब्रह्मा के पास जाओ और जो आज्ञा हो वही करो। यह कहकर परम चतुर नारद राम-गुण गाते और हरि-माया का बल बार-बार बखानते चले गए।

59.1

नाना भाँति मनहि समुझावा । प्रगट न ज्ञान हृदयँ भ्रम छावा ॥
खेद खिन्न मन तर्क बढ़ाई । भयउ मोह बस तुम्हरिहिं नाँई ॥

nānā bhām̐ti manahi samujhāvā | pragaṭa na jñāna hṛdayam̐ bhrama chāvā ||
kheda khinna mana tarka bar̤hāī | bhayau moha basa tumharihiṃ nām̐ī ||

59.2

व्याकुल गयउ देवरिषि पाहीं । कहेसि जो संसय निज मन माहीं ॥
सुनि नारदहि लागि अति दाया । सुनु खग प्रबल राम के माया ॥

vyākula gayau devariṣi pāhīṃ | kahesi jo saṃsaya nija mana māhīṃ ||
suni nāradahi lāgi ati dāyā | sunu khaga prabala rāma ke māyā ||

59.3

जो ज्ञानिन्ह कह चित अपहरई । बरिआई बिमोह मन करई ॥
जेहिं बहु बार नचावा मोही । सोइ ब्यापी बिहङ्गपति तोही ॥

jo jñāninha kaha cita apaharaī | bariāī bimoha mana karaī ||
jehiṃ bahu bāra nacāvā mohī | soi byāpī bihaṅgapati tohī ||

59.4

महामोह उपजा उर तोरें । मिटिहि न बेगि कहें खग मोरें ॥
चतुरानन पहिं जाहु खगेसा । सोइ करेहु जेहि होइ निदेसा ॥

mahāmoha upajā ura toreṃ | miṭihi na begi kaheṃ khaga moreṃ ||
caturānana pahiṃ jāhu khagesā | soi karehu jehi hoi nidesā ||

दो॰ 59दोहा

दो अस कहि चले देवरिषि, करत राम गुन गान ।
हरि माया बल बरनत, पुनि पुनि परम सुजान ॥

do asa kahi cale devariṣi, karata rāma guna gāna |
hari māyā bala baranata, puni puni parama sujāna ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0