उत्तरकाण्ड

अध्याय 58: नागपाश के बाद गरुड़ का संशय

5 श्लोक · 58 में से 130

इस अध्याय में क्या होता है

नागपाश के बाद गरुड़ का संशय

भगवान शिव गिरिजा से कहते हैं, जिस समय मैं उस पक्षी के पास गया था, वह इतिहास मैंने कह दिया। अब सुनो कि पक्षिकुल के ध्वज गरुड़ कौए के पास क्यों गए। जब रघुनाथ ने रण-क्रीड़ा की और इन्द्रजीत से अपने को बँधवा लिया, वह लीला सोचकर मुझे लाज आती है, तब नारद मुनि ने गरुड़ को भेजा। बन्धन काटकर गरुड़ चले तो गए, पर उनके हृदय में प्रचण्ड विषाद उपजा। वे बार-बार प्रभु के बन्धन पर विचार करने लगे। व्यापक, निर्मल, वाणी के स्वामी, माया और मोह से परे परमेश्वर ब्रह्म, उन्हीं का अवतार सुना था, पर वैसा प्रभाव तो कुछ देखा नहीं। जिनका नाम जपकर मनुष्य भव-बन्धन से छूट जाते हैं, उन्हीं राम को एक तुच्छ राक्षस ने नागपाश में बाँध दिया!

58.1

गिरिजा कहेउँ सो सब इतिहासा । मैं जेहि समय गयउँ खग पासा ॥
अब सो कथा सुनहु जेहि हेतू । गयउ काग पहिं खग-कुल केतू ॥

girijā kaheum̐ so saba itihāsā | maiṃ jehi samaya gayaum̐ khaga pāsā ||
aba so kathā sunahu jehi hetū | gayau kāga pahiṃ khaga-kula ketū ||

58.2

जब रघुनाथ कीन्ह रन क्रीड़ा । समुझत चरित होत मोहि ब्रीड़ा ॥
इन्द्रजीत कर आपु बँधायो । तब नारद मुनि गरुड़ पठायो ॥

jaba raghunātha kīnha rana krīr̤ā | samujhata carita hota mohi brīr̤ā ||
indrajīta kara āpu bam̐dhāyo | taba nārada muni garur̤a paṭhāyo ||

58.3

बन्धन काटि गयो उरगादा । उपजा हृदयँ प्रचंड बिषादा ॥
प्रभु बन्धन समुझत बहु भाँती । करत विचार उरग-आराती ॥

bandhana kāṭi gayo uragādā | upajā hṛdayam̐ pracaṃḍa biṣādā ||
prabhu bandhana samujhata bahu bhām̐tī | karata vicāra uraga-ārātī ||

58.4

व्यापक ब्रह्म बिरज बागीसा । माया मोह पार परमीसा ॥
सो अवतार सुनेउँ जग माहीं । देखेउँ सो प्रभाव कछु नाहीं ॥

vyāpaka brahma biraja bāgīsā | māyā moha pāra paramīsā ||
so avatāra suneum̐ jaga māhīṃ | dekheum̐ so prabhāva kachu nāhīṃ ||

दो॰ 58दोहा

भव बन्धन तें छूटहिँ, नर जपि जा कर नाम ।
खर्च निसाचर बाँधेउ, नागपास सोइ राम ॥

bhava bandhana teṃ chūṭahim̐, nara japi jā kara nāma |
kharca nisācara bām̐dheu, nāgapāsa soi rāma ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0