उत्तरकाण्ड

अध्याय 37: चन्दन और कुल्हाड़ी

5 श्लोक · 37 में से 130

इस अध्याय में क्या होता है

चन्दन और कुल्हाड़ी

भरत ढिठाई करके कहते हैं: हे कृपानिधि, मैं आपका सेवक हूँ। वेद-पुराणों ने सन्तों की महिमा अनेक प्रकार से गाई है, और आपने भी अपने श्रीमुख से उनकी बड़ाई की है, क्योंकि उन पर आपकी अधिक प्रीति है। मैं उनके लक्षण सुनना चाहता हूँ, और सन्त-असन्त का भेद अलग करके समझना चाहता हूँ। श्रीराम कहते हैं: भाई, सन्तों के लक्षण अगणित हैं और श्रुति-पुराणों में प्रसिद्ध हैं। सन्त और असन्त का आचरण चन्दन और कुल्हाड़ी जैसा है। कुल्हाड़ी चन्दन को काटती है, पर चन्दन अपने स्वभाव से उसे भी सुगन्धित कर देता है। इसी से चन्दन जगत को प्रिय होकर देवताओं के सिर चढ़ता है, और कुल्हाड़ी के मुख को आग में तपाकर घन से पीटा जाता है, यही उसका दण्ड है।

37.1

करउँ कृपानिधि एक ढिठाई । मैं सेवक तुम्ह जन सुखदाई ॥
सन्तन्ह कै महिमा रघुराई । बहु विधि बेद पुरानन्ह गाई ॥

karaum̐ kṛpānidhi eka ḍhiṭhāī | maiṃ sevaka tumha jana sukhadāī ||
santanha kai mahimā raghurāī | bahu vidhi beda purānanha gāī ||

37.2

श्रीमुख तुम्ह पुनि कीन्हि बड़ाई । तिन्ह पर प्रभुहि प्रीति अधिकाई ॥
सुना चहउँ प्रभु तिन्ह कर लच्छन । कृपासिन्धु गुन ज्ञान बिचच्छन ॥

śrīmukha tumha puni kīnhi bar̤āī | tinha para prabhuhi prīti adhikāī ||
sunā cahaum̐ prabhu tinha kara lacchana | kṛpāsindhu guna jñāna bicacchana ||

37.3

सन्त असन्त भेद बिलगाई । प्रनतपाल मोहि कहहु बुझाई ॥
सन्तन्ह के लच्छन सुनु भ्राता । अगनित श्रुति पुरान बिख्याता ॥

santa asanta bheda bilagāī | pranatapāla mohi kahahu bujhāī ||
santanha ke lacchana sunu bhrātā | aganita śruti purāna bikhyātā ||

37.4

सन्त असंतन्हि कै असि करनी । जिमि कुठार चन्दन आचरनी ॥
काटइ परसु मलय सुनु भाई । निज गुन देइ सुगन्ध बसाई ॥

santa asaṃtanhi kai asi karanī | jimi kuṭhāra candana ācaranī ||
kāṭai parasu malaya sunu bhāī | nija guna dei sugandha basāī ||

दो॰ 37दोहा

तातें सुर सीसन्ह चढ़त जग बल्लभ श्रीखंड ।
अनल दाहि पीटत घनहिं, परसु बदन यह दंड ॥

tāteṃ sura sīsanha car̤hata jaga ballabha śrīkhaṃḍa |
anala dāhi pīṭata ghanahiṃ, parasu badana yaha daṃḍa ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0