उत्तरकाण्ड

अध्याय 34: सनकादि की श्रीराम-स्तुति

5 श्लोक · 34 में से 130

इस अध्याय में क्या होता है

सनकादि की श्रीराम-स्तुति

प्रभु के वचन सुनकर चारों मुनि पुलकित होकर स्तुति आरम्भ करते हैं। हे भगवन्त, अनन्त, निर्विकार, अनेक और एक, करुणामय, आपकी जय हो। निर्गुण की जय, गुणों के सागर की जय, सुख के मन्दिर, सुन्दर और परम चतुर प्रभु की जय। इन्दिरापति की जय, पृथ्वी धारण करने वाले, अनुपम, अजन्मा, अनादि की जय। आप ज्ञान के निधान हैं, स्वयं मानरहित और दूसरों को मान देने वाले, जिनका पावन यश वेद-पुराण गाते हैं। आप तत्त्वज्ञ, कृतज्ञ, अनेक नामों वाले और अनाम, निरंजन हैं। आप सर्वरूप, सर्वव्यापी, सबके हृदय में बसने वाले हैं; सदा हमारी रक्षा कीजिए। द्वन्द्व और भवबन्धन काटिए; हे राम, हृदय में बसकर काम को नष्ट कीजिए। हमें अचल प्रेमाभक्ति दीजिए।

34.1

सुनि प्रभु बचन हरषि मुनि चारी । पुलकित तनु अस्तुति अनुसारी ॥
जय भगवन्त अनन्त अनामय । अनघ अनेक एक करुनामय ॥

suni prabhu bacana haraṣi muni cārī | pulakita tanu astuti anusārī ||
jaya bhagavanta ananta anāmaya | anagha aneka eka karunāmaya ||

34.2

जय निर्गुन जय जय गुन सागर । सुख मन्दिर सुन्दर अति नागर ॥
जय इन्दिरा-रमन जय भूधर । अनुपम अज अनादि सोभाकर ॥

jaya nirguna jaya jaya guna sāgara | sukha mandira sundara ati nāgara ||
jaya indirā-ramana jaya bhūdhara | anupama aja anādi sobhākara ||

34.3

ज्ञान निधान अमान मान-प्रद । पावन सुजस पुरान बेद बद ॥
तज्ञ कृतज्ञ अज्ञता भञ्जन । नाम अनेक अनाम निरञ्जन ॥

jñāna nidhāna amāna māna-prada | pāvana sujasa purāna beda bada ||
tajña kṛtajña ajñatā bhañjana | nāma aneka anāma nirañjana ||

34.4

सर्व सर्बगत सर्व उरालय । बससि सदा हम कहुँ परिपालय ॥
द्वन्द बिपति भव फन्द बिभंजय । ह्रदि असि राम काम पद गंजय ॥

sarva sarbagata sarva urālaya | basasi sadā hama kahum̐ paripālaya ||
dvanda bipati bhava phanda bibhaṃjaya | hradi asi rāma kāma pada gaṃjaya ||

दो॰ 34दोहा

परमानन्द कृपायतन, मन परिपूरन काम ।
प्रेम-भगति अनपायनी, देहु हमहि श्रीराम ॥

paramānanda kṛpāyatana, mana paripūrana kāma |
prema-bhagati anapāyanī, dehu hamahi śrīrāma ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0