कीन्ह दंडवत तीनिउँ भाई । सहित पवन-सुत सुख अधिकाई ॥
मुनि रघुपति छबि अतुल बिलोकी । भए मगन मन सके न रोकी ॥
kīnha daṃḍavata tīnium̐ bhāī | sahita pavana-suta sukha adhikāī ||
muni raghupati chabi atula bilokī | bhae magana mana sake na rokī ||
5 श्लोक · 33 में से 130
भाई और हनुमान भी दण्डवत करते हैं। मुनि रघुपति की अतुल छवि, श्याम शरीर और कमल-नयन देखकर ऐसे मग्न होते हैं कि मन रोक नहीं पाते। वे एकटक देखते हैं, और प्रभु हाथ जोड़े सिर झुकाए खड़े हैं। उनकी दशा देखकर रघुवीर के भी नेत्रों से जल बहता है। वे मुनियों को बैठाकर कहते हैं: आज मैं धन्य हूँ, आपके दर्शन से पाप नष्ट होते हैं। बड़े भाग्य से सत्संग मिलता है, जिससे बिना परिश्रम भवबन्धन टूट जाता है। सन्तों का संग मोक्ष का और कामियों का संग जन्म-मरण का मार्ग है; यही सन्त, विद्वान, श्रुति और पुराण कहते हैं।
कीन्ह दंडवत तीनिउँ भाई । सहित पवन-सुत सुख अधिकाई ॥
मुनि रघुपति छबि अतुल बिलोकी । भए मगन मन सके न रोकी ॥
kīnha daṃḍavata tīnium̐ bhāī | sahita pavana-suta sukha adhikāī ||
muni raghupati chabi atula bilokī | bhae magana mana sake na rokī ||
स्यामल गात सरोरुह-लोचन । सुन्दरता मन्दिर भव मोचन ॥
एकटक रहे निमेष न लावहिँ । प्रभु कर जोरें सीस नवावहिं ॥
syāmala gāta saroruha-locana | sundaratā mandira bhava mocana ||
ekaṭaka rahe nimeṣa na lāvahim̐ | prabhu kara joreṃ sīsa navāvahiṃ ||
तिन्ह के दसा देखि रघुबीरा । स्त्रवत नयन जल पुलक सरीरा ॥
कर गहि प्रभु मुनिबर बैठारे । परम मनोहर बचन उचारे ॥
tinha ke dasā dekhi raghubīrā | stravata nayana jala pulaka sarīrā ||
kara gahi prabhu munibara baiṭhāre | parama manohara bacana ucāre ||
आजु धन्य मैं सुनहु मुनीसा । तुम्हरें दरस जाहिँ अघ खीसा ॥
बड़े भाग पाइब सतसंगा । बिनहिँ प्रयास होइ भव भङ्गा ॥
āju dhanya maiṃ sunahu munīsā | tumhareṃ darasa jāhim̐ agha khīsā ||
bar̤e bhāga pāiba satasaṃgā | binahim̐ prayāsa hoi bhava bhaṅgā ||
सन्त सङ्ग अपबर्ग कर, कामी भव कर पन्थ ।
कहहिं सन्त कवि कोबिद, श्रुति पुरान सदग्रन्थ ॥
santa saṅga apabarga kara, kāmī bhava kara pantha |
kahahiṃ santa kavi kobida, śruti purāna sadagrantha ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0