भ्रातन्ह सहित राम एक धारा । सङ्ग परम प्रिय पवन-कुमारी ॥
सुन्दर उपबन देखन गये । सब तरु कुसुमित पल्लव नये ॥
bhrātanha sahita rāma eka dhārā | saṅga parama priya pavana-kumārī ||
sundara upabana dekhana gaye | saba taru kusumita pallava naye ||
5 श्लोक · 32 में से 130
एक बार श्रीराम भाइयों और प्रिय हनुमान के साथ एक उपवन में जाते हैं, जहाँ सब वृक्ष फूलों से लदे हैं। अवसर जानकर सनकादि मुनि आते हैं, जो सदा ब्रह्मानन्द में लीन हैं, देखने में बालक पर बहुत पुराने, मानो चारों वेद रूप धरकर आए हों। वे समदर्शी हैं, दिशाएँ उनका वस्त्र हैं, और उनका एक ही व्यसन है रघुपति का चरित सुनना। भगवान शिव भवानी से कहते हैं, सनकादि मुनि अगस्त्य के पास रहे थे, जिनकी रामकथा ज्ञान को ऐसे प्रकट करती है जैसे अरणि अग्नि को। उन्हें आते देख श्रीराम हर्षित होकर दण्डवत करते हैं और बैठने के लिए अपना पीताम्बर बिछा देते हैं।
भ्रातन्ह सहित राम एक धारा । सङ्ग परम प्रिय पवन-कुमारी ॥
सुन्दर उपबन देखन गये । सब तरु कुसुमित पल्लव नये ॥
bhrātanha sahita rāma eka dhārā | saṅga parama priya pavana-kumārī ||
sundara upabana dekhana gaye | saba taru kusumita pallava naye ||
जानि समय सनकादिक आये । तेज पुञ्ज गुन सील सुहाये ॥
ब्रह्मानन्द सदा लयलीना । देखत बालक बहुकालीना ॥
jāni samaya sanakādika āye | teja puñja guna sīla suhāye ||
brahmānanda sadā layalīnā | dekhata bālaka bahukālīnā ||
रूप धरें जनु चारिउ बेदा । समदरसी मुनि बिगत बिभेदा ॥
आसा बसन व्यसन यह तिन्हहीँ । रघुपति चरित होइ तहँ सुनहीं ॥
rūpa dhareṃ janu cāriu bedā | samadarasī muni bigata bibhedā ||
āsā basana vyasana yaha tinhahīm̐ | raghupati carita hoi taham̐ sunahīṃ ||
तहाँ रहे सनकादि भवानी । जहँ घटसम्भव मुनिबर ज्ञानी ॥
रामकथा मुनि बहु बरनी । ज्ञान-जोनि पावक जिमि अरनी ॥
tahām̐ rahe sanakādi bhavānī | jaham̐ ghaṭasambhava munibara jñānī ||
rāmakathā muni bahu baranī | jñāna-joni pāvaka jimi aranī ||
देखि राम मुनि आवत, हरषि दंडवत कीन्ह ।
स्वागत पूँछि पीत-पट, प्रभु बैठन कहँ दीन्ह ॥
dekhi rāma muni āvata, haraṣi daṃḍavata kīnha |
svāgata pūm̐chi pīta-paṭa, prabhu baiṭhana kaham̐ dīnha ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0