उत्तरकाण्ड

अध्याय 31: राम-प्रताप रूपी सूर्य का उदय

5 श्लोक · 31 में से 130

इस अध्याय में क्या होता है

राम-प्रताप रूपी सूर्य का उदय

काकभुशुण्डि गरुड़ से कहते हैं, जब राम-प्रताप रूपी प्रचण्ड सूर्य उदित हुआ, तब उसका प्रकाश तीनों लोकों में भर गया; बहुतों को सुख हुआ और बहुतों के मन में शोक। पहले वे शोक करने वालों को गिनाते हैं। अविद्या की रात मिट गई। पाप रूपी उल्लू जहाँ-तहाँ छिप गए, और काम-क्रोध रूपी कुमुदिनी सकुचा गईं। कर्म, गुण, काल और स्वभाव रूपी चकोर अब कभी सुख नहीं पाते, और मत्सर, मान, मोह और मद रूपी चोरों का हुनर कहीं नहीं चलता। धर्म रूपी तालाब में ज्ञान और विज्ञान रूपी कमल अनेक प्रकार से खिल गए, और सुख, सन्तोष, वैराग्य और विवेक रूपी चकवे शोकरहित हो गए। वे कहते हैं, यह प्रताप-सूर्य जिसके हृदय में प्रकाश करता है, उसमें पिछले बढ़ते हैं और पहले कहे हुए नष्ट हो जाते हैं।

31.1

जब तैं राम प्रताप खगेसा । उदित भयउ अति प्रबल दिनेसा ॥
पूरि प्रकास रहेउ तिहुँ लोका । बहुतेन्ह सुख बहुतन मन सोका ॥

jaba taiṃ rāma pratāpa khagesā | udita bhayau ati prabala dinesā ||
pūri prakāsa raheu tihum̐ lokā | bahutenha sukha bahutana mana sokā ||

31.2

जिन्हहिँ सोक ते कहउँ बखानी । प्रथम अबिद्या-निसा नसानी ॥
अघ उलूक जहँ तहाँ लुकाने । काम क्रोध कैरव सकुचाने ॥

jinhahim̐ soka te kahaum̐ bakhānī | prathama abidyā-nisā nasānī ||
agha ulūka jaham̐ tahām̐ lukāne | kāma krodha kairava sakucāne ||

31.3

बिबिध कर्म गुन काल सुभाऊ । ये चकोर सुख लहहिँ न काऊ ॥
मत्सर मान मोह मद चोरा । इन्ह कर हुनर न कवनिहुँ ओरा ॥

bibidha karma guna kāla subhāū | ye cakora sukha lahahim̐ na kāū ||
matsara māna moha mada corā | inha kara hunara na kavanihum̐ orā ||

31.4

धरम तड़ाग ज्ञान विज्ञाना । ये पङ्कज, बिकसे बिधि नाना ॥
सुख सन्तोष बिराग बिबेका । बिगत सोक ये कोक अनेका ॥

dharama tar̤āga jñāna vijñānā | ye paṅkaja, bikase bidhi nānā ||
sukha santoṣa birāga bibekā | bigata soka ye koka anekā ||

दो॰ 31दोहा

यह प्रताप रबि जाकें, उर जब करइ प्रकास ।
पछिले बाढ़हिं प्रथम जे, कहे ते पावहिं नास ॥

yaha pratāpa rabi jākeṃ, ura jaba karai prakāsa |
pachile bār̤hahiṃ prathama je, kahe te pāvahiṃ nāsa ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0