दूरि फराक रुचिर से घाटा । जहँ जल पिअहिँ बाजि गज ठाटा ॥
पनिघट परम मनोहर नाना । तहाँ न पुरुष करहिं अस्नाना ॥
dūri pharāka rucira se ghāṭā | jaham̐ jala piahim̐ bāji gaja ṭhāṭā ||
panighaṭa parama manohara nānā | tahām̐ na puruṣa karahiṃ asnānā ||
6 श्लोक · 29 में से 130
दूर हटकर सुन्दर घाट हैं, जहाँ घोड़े-हाथी पानी पीते हैं; पानी भरने के अलग पनघट हैं, जहाँ पुरुष स्नान नहीं करते; और राजघाट है, जहाँ चारों वर्णों के लोग नहाते हैं। तट-तट पर देवमन्दिर हैं, जिनके चारों ओर उपवन हैं। किनारे कहीं-कहीं ज्ञानरत विरक्त मुनि और संन्यासी रहते हैं, और मुनियों ने तट पर तुलसी के झुण्ड लगाए हैं। नगर के बाहर की शोभा और भी अधिक है; पुरी को देखते ही सब पाप भाग जाते हैं। निर्मल जल वाली बावलियाँ और तालाब देवताओं और मुनियों को मोहते हैं, कमल खिले हैं, और कोयल की कूक मानो पथिकों को बुलाती है। जहाँ लक्ष्मीपति राजा हैं, वहाँ सिद्धियाँ और सब सुख छाए हैं।
दूरि फराक रुचिर से घाटा । जहँ जल पिअहिँ बाजि गज ठाटा ॥
पनिघट परम मनोहर नाना । तहाँ न पुरुष करहिं अस्नाना ॥
dūri pharāka rucira se ghāṭā | jaham̐ jala piahim̐ bāji gaja ṭhāṭā ||
panighaṭa parama manohara nānā | tahām̐ na puruṣa karahiṃ asnānā ||
राजघाट सब विधि सुन्दर घर । मज्जहिं तहाँ बरन चारिउ नर ॥
तीर तीर देवन्ह के मन्दिर । चहुँ दिसि जिन्ह के उपबन सुन्दर ॥
rājaghāṭa saba vidhi sundara ghara | majjahiṃ tahām̐ barana cāriu nara ||
tīra tīra devanha ke mandira | cahum̐ disi jinha ke upabana sundara ||
कहुँ कहुँ सरिता तीर उदासी । बसहिँ ग्यान रत मुनि संन्यासी ॥
तीर तीर तुलसिका सुहाई । वृन्द बृन्द बहु मुनिन्ह लगाई ॥
kahum̐ kahum̐ saritā tīra udāsī | basahim̐ gyāna rata muni saṃnyāsī ||
tīra tīra tulasikā suhāī | vṛnda bṛnda bahu muninha lagāī ||
पुर सोभा कछु बरनि न जाई । बाहेर नगर परम रुचिराई ॥
देखत पुरी अखिल अघ भागा । बन उपबन बापिका तड़ागा ॥
pura sobhā kachu barani na jāī | bāhera nagara parama rucirāī ||
dekhata purī akhila agha bhāgā | bana upabana bāpikā tar̤āgā ||
बापीं तड़ाग अनूप कूप, मनोहरायत सोहहीं ।
सोपान सुन्दर नीर निर्मल, देखि सुर मुनि मोहहीं ॥
बहु रङ्ग, कञ्ज अनेक खग, कूजहिँ मधुप गुंजारहीं ।
आराम रम्य पिकादि खग रव जनु पथिक हङ्कारहीं ॥
bāpīṃ tar̤āga anūpa kūpa, manoharāyata sohahīṃ |
sopāna sundara nīra nirmala, dekhi sura muni mohahīṃ ||
bahu raṅga, kañja aneka khaga, kūjahim̐ madhupa guṃjārahīṃ |
ārāma ramya pikādi khaga rava janu pathika haṅkārahīṃ ||
रमानाथ जहँ राजा, सो पुर बरनि कि जाइ ।
अनिमादिक सुख सम्पदा, रहीं अवध सब छाइ ॥
ramānātha jaham̐ rājā, so pura barani ki jāi |
animādika sukha sampadā, rahīṃ avadha saba chāi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0