प्रातःकाल सरयू में स्नान करके श्रीराम ब्राह्मणों और सज्जनों के साथ सभा में बैठते हैं। वसिष्ठ वेद-पुराण सुनाते हैं, और श्रीराम सब जानते हुए भी सुनते हैं। वे भाइयों के साथ भोजन करते हैं, जिसे देख माताएँ आनन्दित होती हैं। भरत और शत्रुघ्न हनुमान के साथ उपवन में जाकर राम के गुणों की कथा पूछते हैं; हनुमान सुनाते हैं, और वे विनती करके बार-बार कहलवाते हैं। घर-घर में पुराण और पावन रामचरित कहे जाते हैं। नर-नारी राम के गुण गाते हैं, और दिन-रात बीतते पता नहीं चलता। जहाँ राजा राम विराजते हैं, उस अवधपुरी के सुख को हज़ार शेष भी नहीं कह सकते।