उत्तरकाण्ड

अध्याय 26: प्रभु की दिनचर्या और नगर की कथा

5 श्लोक · 26 में से 130

इस अध्याय में क्या होता है

प्रभु की दिनचर्या और नगर की कथा

प्रातःकाल सरयू में स्नान करके श्रीराम ब्राह्मणों और सज्जनों के साथ सभा में बैठते हैं। वसिष्ठ वेद-पुराण सुनाते हैं, और श्रीराम सब जानते हुए भी सुनते हैं। वे भाइयों के साथ भोजन करते हैं, जिसे देख माताएँ आनन्दित होती हैं। भरत और शत्रुघ्न हनुमान के साथ उपवन में जाकर राम के गुणों की कथा पूछते हैं; हनुमान सुनाते हैं, और वे विनती करके बार-बार कहलवाते हैं। घर-घर में पुराण और पावन रामचरित कहे जाते हैं। नर-नारी राम के गुण गाते हैं, और दिन-रात बीतते पता नहीं चलता। जहाँ राजा राम विराजते हैं, उस अवधपुरी के सुख को हज़ार शेष भी नहीं कह सकते।

26.1

प्रातकाल सरजू करि मज्जन । बैठहिँ सभाँ सङ्ग द्विज सज्जन ॥
बेद पुरान बसिष्ठ बखानहिं । सुनहिं राम जद्यपि सब जानहिँ ॥

prātakāla sarajū kari majjana | baiṭhahim̐ sabhām̐ saṅga dvija sajjana ||
beda purāna basiṣṭha bakhānahiṃ | sunahiṃ rāma jadyapi saba jānahim̐ ||

26.2

अनुजन्ह संजुत भोजन करहीं । देखि सकल जननीं सुख भरहीं ॥
भरत सत्रुहन दोनउ भाई । सहित पवनसुत उपबन जाई ॥

anujanha saṃjuta bhojana karahīṃ | dekhi sakala jananīṃ sukha bharahīṃ ||
bharata satruhana donau bhāī | sahita pavanasuta upabana jāī ||

26.3

बुझहिँ बैठि राम गुन गाहा । कह हनुमान सुमति अवगाहा ॥
सुनत बिमल गुन अति सुख पावहिँ । बहुरि बहुरि करि बिनय कहावहिं ॥

bujhahim̐ baiṭhi rāma guna gāhā | kaha hanumāna sumati avagāhā ||
sunata bimala guna ati sukha pāvahim̐ | bahuri bahuri kari binaya kahāvahiṃ ||

26.4

सब कें गृह गृह होहिं पुराना । रामचरित पावन विधि नाना ॥
नर अरु नारि राम गुन गानहिँ । करहिँ दिवस निसि जात न जान ॥

saba keṃ gṛha gṛha hohiṃ purānā | rāmacarita pāvana vidhi nānā ||
nara aru nāri rāma guna gānahim̐ | karahim̐ divasa nisi jāta na jāna ||

दो॰ 26दोहा

अवधपुरी बासिन्ह कर, सुख सम्पदा समाज ।
सहस सेष नहिँ कहि सकहिं, जहँ नृप राम बिराज ॥

avadhapurī bāsinha kara, sukha sampadā samāja |
sahasa seṣa nahim̐ kahi sakahiṃ, jaham̐ nṛpa rāma birāja ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0