पुनि कृपाल लियो बोलि निषादा । दीन्हे भूषन बसन प्रसादा ॥
जाहु भवन सम सुमिरन करेहू । मन क्रम बचन धर्म अनुसरेहू ॥
puni kṛpāla liyo boli niṣādā | dīnhe bhūṣana basana prasādā ||
jāhu bhavana sama sumirana karehū | mana krama bacana dharma anusarehū ||
5 श्लोक · 20 में से 130
कृपालु प्रभु निषादराज गुह को बुलाकर प्रसाद रूप में आभूषण और वस्त्र देते हैं। घर जाओ, मेरा स्मरण करते रहो, और मन, कर्म, वचन से धर्म का पालन करो। तुम मेरे सखा और भरत के समान भाई हो; नगर में आते-जाते रहना। गुह आँसू भरे चरणों पर गिर पड़ते हैं, चरण हृदय में रखकर घर आते हैं और परिवार को प्रभु का स्वभाव सुनाते हैं। श्रीराम के राज्य पर बैठते ही तीनों लोक हर्षित हो जाते हैं और सब शोक मिट जाता है। कोई किसी से वैर नहीं करता; राम के प्रताप से भेदभाव मिट गया है। लोग वेदमार्ग पर अपने वर्णाश्रम धर्म में लगे हैं, और उन्हें न भय है, न शोक, न रोग।
पुनि कृपाल लियो बोलि निषादा । दीन्हे भूषन बसन प्रसादा ॥
जाहु भवन सम सुमिरन करेहू । मन क्रम बचन धर्म अनुसरेहू ॥
puni kṛpāla liyo boli niṣādā | dīnhe bhūṣana basana prasādā ||
jāhu bhavana sama sumirana karehū | mana krama bacana dharma anusarehū ||
तुम्ह मम सखा भरत सन भ्राता । सदा रहेहु पुर आवत जाता ॥
बचन सुनत उपजा सुख भारी । परेउ चरन अरि लोचन बारी ॥
tumha mama sakhā bharata sana bhrātā | sadā rahehu pura āvata jātā ||
bacana sunata upajā sukha bhārī | pareu carana ari locana bārī ||
चरन-नलिन उर धरि गृह आवा । प्रभु सुभाउ परिजनन्हि सुनावा ॥
रघुपति चरित देखि पुरबासी । पुनि पुनि कहहिँ धन्य सुख-रासी ॥
carana-nalina ura dhari gṛha āvā | prabhu subhāu parijananhi sunāvā ||
raghupati carita dekhi purabāsī | puni puni kahahim̐ dhanya sukha-rāsī ||
राम राज बैठे त्रेलोका । हरषित भये गये सब सोका ॥
बयरु न कर काहू सन कोई । राम-प्रताप विषमता खोई ॥
rāma rāja baiṭhe trelokā | haraṣita bhaye gaye saba sokā ||
bayaru na kara kāhū sana koī | rāma-pratāpa viṣamatā khoī ||
बरनाश्रम निज निज धरम, बनिरत बेद-पथ लोग ।
चलहिँ सदा पावहिँ सुख, नहिँ भय सोक न रोग ॥
baranāśrama nija nija dharama, banirata beda-patha loga |
calahim̐ sadā pāvahim̐ sukha, nahim̐ bhaya soka na roga ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0