रामराज्य में किसी को दैहिक, दैविक या भौतिक ताप नहीं सताता। सब परस्पर प्रेम करते हैं और श्रुति की नीति से अपने धर्म में लगे रहते हैं। धर्म अपने चारों चरणों पर खड़ा है, और पाप सपने में भी नहीं दिखता। नर-नारी सब राम-भक्ति में लीन और परम गति के अधिकारी हैं। किसी की अकाल मृत्यु नहीं होती, किसी को पीड़ा नहीं; सब सुन्दर और निरोग हैं। न कोई दरिद्र है, न दुखी, न मूर्ख। सब दम्भरहित, चतुर, पण्डित, कृतज्ञ हैं, किसी में कपट नहीं। काकभुशुण्डि गरुड़ से कहते हैं, रामराज्य में चराचर जगत में किसी को काल, कर्म, स्वभाव या गुणों से उपजा दुःख नहीं।