बन्दीजन के वेश में वेद छह छन्दों में स्तुति करते हैं। सगुण-निर्गुण रूप वाले, रावण को मारने वाले, संसार का भार हरने को मनुष्य बने प्रभु, आपकी जय हो। आपकी माया के वश सब जीव जन्म-मरण के मार्ग पर भटकते हैं; जिन पर आपकी कृपादृष्टि पड़ी, वे तीनों तापों से छूटे। जो ज्ञान के मद में भक्ति का आदर नहीं करते, वे देवदुर्लभ पद पाकर भी गिरते हैं, और जो विश्वास से नाम जपते हैं वे सहज तर जाते हैं। वे उन चरणों का स्तवन करते हैं जिनकी धूल से अहल्या तरी और जिनके नख से गंगा निकलीं, और अव्यक्त मूल वाले संसार-वृक्ष को नमन करते हैं। दूसरे निर्गुण ब्रह्म का ध्यान करें, हम आपका सगुण यश गाएँ। फिर वे अन्तर्धान होते हैं, और शम्भु प्रभु के पास आते हैं।
जय सगुन निर्गुन रूप रूप अनूप भूप सिरोमने । दसकन्धरादि प्रचंड निसिचर, प्रबल खल भुज बल हने ॥ अवतार नर संसार भार बिभंजि दारुन दुख दहे । जय प्रनतपाल दयाल प्रभु संजुक्त सक्ति नमामहे ॥
तव विषम माया बस सुरासुर, नाग नर अग जग हरे । भव पन्थ भ्रमत अमित दिवस निसि, काल कर्म गुननि भरे ॥ जे नाथ करि करुना बिलोके, त्रिबिधि दुख ते निर्वहे । भव-खेद छेदन दच्छ हम कह, रच्छ राम नमामहे ॥
tava viṣama māyā basa surāsura, nāga nara aga jaga hare | bhava pantha bhramata amita divasa nisi, kāla karma gunani bhare || je nātha kari karunā biloke, tribidhi dukha te nirvahe | bhava-kheda chedana daccha hama kaha, raccha rāma namāmahe ||
जे ज्ञान-मान-बिमत्त तव भव, हरनि भगति न आदरी । ते पाइ सुर-दुर्लभ-पदादपि, पात हम देखत हरी ॥ बिस्वास करि सब आस परिहरि, दास तव जे होइ रहे । जपि नाम तव बिनु श्रम तरहिं भव, नाथ सो समरामहे ॥
je jñāna-māna-bimatta tava bhava, harani bhagati na ādarī | te pāi sura-durlabha-padādapi, pāta hama dekhata harī || bisvāsa kari saba āsa parihari, dāsa tava je hoi rahe | japi nāma tava binu śrama tarahiṃ bhava, nātha so samarāmahe ||
जे ब्रह्म अजमद्वैतमनुभवगम्य मनपर ध्यावहीं । ते कहहुं जानहुँ नाथ हम तव, सगुन जल नित गावहीं ॥ करुनायतन प्रभु सदगुनाकर, देव यह बर मागहीं । मन बचन कर्म बिकार तजि तव, चरन हम अनुरागहीं ॥
je brahma ajamadvaitamanubhavagamya manapara dhyāvahīṃ | te kahahuṃ jānahum̐ nātha hama tava, saguna jala nita gāvahīṃ || karunāyatana prabhu sadagunākara, deva yaha bara māgahīṃ | mana bacana karma bikāra taji tava, carana hama anurāgahīṃ ||