अवधपुरी अति रुचिर बनाई । देवन्ह सुमन-बृष्टि झरि लाई ॥
राम कहा सेवकन्ह बुलाई । प्रथम सखन्ह अन्हवावहु जाई ॥
avadhapurī ati rucira banāī | devanha sumana-bṛṣṭi jhari lāī ||
rāma kahā sevakanha bulāī | prathama sakhanha anhavāvahu jāī ||
7 श्लोक · 11 में से 130
अयोध्या सजाई जाती है और देवता फूल बरसाते हैं। श्रीराम सेवकों को बुलाकर कहते हैं, पहले मेरे सखाओं को स्नान कराओ, और सुग्रीव आदि तुरन्त नहलाए जाते हैं। फिर करुणानिधि भरत को बुलाकर अपने हाथों से उनकी जटाएँ सुलझाते हैं। वे तीनों भाइयों को स्नान कराते हैं। भरत के भाग्य और प्रभु की कोमलता को करोड़ों शेष भी नहीं गा सकते। तब गुरु से आज्ञा माँगकर प्रभु अपनी जटाएँ खोलते और स्नान करते हैं, और ऐसे आभूषण पहनते हैं कि कामदेव भी लजा जाए। सासें जानकी को स्नान कराकर दिव्य वस्त्र पहनाती हैं। श्रीराम के बाईं ओर वे लक्ष्मी-सी शोभती हैं, और माताएँ अपना जन्म सफल मानती हैं। काकभुशुण्डि गरुड़ से कहते हैं, उस समय ब्रह्मा, शिव और मुनि विमानों पर दर्शन को आए।
अवधपुरी अति रुचिर बनाई । देवन्ह सुमन-बृष्टि झरि लाई ॥
राम कहा सेवकन्ह बुलाई । प्रथम सखन्ह अन्हवावहु जाई ॥
avadhapurī ati rucira banāī | devanha sumana-bṛṣṭi jhari lāī ||
rāma kahā sevakanha bulāī | prathama sakhanha anhavāvahu jāī ||
सुनत बचन जहँ तहँ जन धाये । सुग्रीवादि तुरत अन्हवाये ॥
पुनि करुनानिधि भरत हँकारे । निज कर राम जटा निरुआरे ॥
sunata bacana jaham̐ taham̐ jana dhāye | sugrīvādi turata anhavāye ||
puni karunānidhi bharata ham̐kāre | nija kara rāma jaṭā niruāre ||
अन्हवाये प्रभु तीनिउँ भाई । भगत बछल कृपाल रघुराई ॥
भरत भाग्य प्रभु कोमलताई । सेष कोटि सत सकहिं न गाई ॥
anhavāye prabhu tīnium̐ bhāī | bhagata bachala kṛpāla raghurāī ||
bharata bhāgya prabhu komalatāī | seṣa koṭi sata sakahiṃ na gāī ||
पुनि निज जटा राम विवराये । गुरु अनुसासन माँगि नहाये ॥
करि मज्जन प्रभु भूषन साजे । अङ्ग अनङ्ग देखि छबि लाजे ॥
puni nija jaṭā rāma vivarāye | guru anusāsana mām̐gi nahāye ||
kari majjana prabhu bhūṣana sāje | aṅga anaṅga dekhi chabi lāje ||
सासुन्ह सादर जानकिहि, मज्जन तुरत कराइ ।
दिव्य बसन बर भूषन, अंग अंग सजे बनाइ ॥
sāsunha sādara jānakihi, majjana turata karāi |
divya basana bara bhūṣana, aṃga aṃga saje banāi ||
राम बाम दिसि सोभति रमा रूप गुन खानि ।
देखि मातु सब हरषीं, जनम सुफल निज जानि ॥
rāma bāma disi sobhati ramā rūpa guna khāni |
dekhi mātu saba haraṣīṃ, janama suphala nija jāni ||
सुनु खगेस तेहि अवसर, ब्रह्मा सिव मुनि बृन्द ।
चढ़ि बिमान आये सब, सुर देखन सुखकन्द ॥
sunu khagesa tehi avasara, brahmā siva muni bṛnda |
car̤hi bimāna āye saba, sura dekhana sukhakanda ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0