सुन्दरकाण्ड

अध्याय 7: विभीषण की व्यथा और प्रभु की रीति

5 श्लोक · 7 में से 60

इस अध्याय में क्या होता है

विभीषण की व्यथा और प्रभु की रीति

विभीषण कहते हैं, पवनपुत्र, मैं यहाँ ऐसे रहता हूँ जैसे दाँतों के बीच जीभ। क्या भानुकुल के नाथ कभी मुझे अनाथ जानकर कृपा करेंगे? मेरा शरीर तामसी है, कोई साधन नहीं, प्रभु के चरणों में प्रीति भी नहीं। पर अब भरोसा हुआ है, क्योंकि हरि की कृपा के बिना सन्त नहीं मिलते। रघुवीर ने अनुग्रह किया है, तभी तुमने आकर मुझे दर्शन दिए। हनुमान कहते हैं, प्रभु की रीति है कि वे सदा सेवक पर प्रेम करते हैं। मैं कौन बड़े कुल का हूँ? चंचल वानर हूँ, सब प्रकार से हीन। जो सवेरे मेरा नाम ले ले, उसे उस दिन भोजन नहीं मिलता। सखा, ऐसे अधम पर भी रघुवीर ने कृपा की है। प्रभु के गुण स्मरण करते हुए हनुमान की आँखें भर आती हैं।

7.1

सुनहु पवन-सुत रहनि हमारी । जिमि दसनन्हि महँ जीभ बिचारी ॥
तात कबहुँ मोहि जानि अनाथा । करिहहिँ कृपा भानुकुल-नाथा ॥

sunahu pavana-suta rahani hamārī | jimi dasananhi maham̐ jībha bicārī ||
tāta kabahum̐ mohi jāni anāthā | karihahim̐ kṛpā bhānukula-nāthā ||

7.2

तामस तनु कछु साधन नाहीँ । प्रीति न पद-सरोज मन माहीं ॥
अब मोहि भा भरोस हनुमन्ता । बिनु हरि कृपा मिलहिँ नहिँ सन्ता ॥

tāmasa tanu kachu sādhana nāhīm̐ | prīti na pada-saroja mana māhīṃ ||
aba mohi bhā bharosa hanumantā | binu hari kṛpā milahim̐ nahim̐ santā ||

7.3

जौँ रघुबीर अनुग्रह कीन्हा । तौ तुम्ह मोहि दरस हठि दीन्हा ॥
सुनहु बिभीषन प्रभु कै रीती । करहिं सदा सेवक पर प्रीती ॥

jaum̐ raghubīra anugraha kīnhā | tau tumha mohi darasa haṭhi dīnhā ||
sunahu bibhīṣana prabhu kai rītī | karahiṃ sadā sevaka para prītī ||

7.4

कहहु कवन मैं परम कुलीना । कपि चञ्चल सबहीं बिधि हीना ॥
प्रात लेइ जो नाम हमारा । तेहि दिन ताहि न मिलइ अहारा ॥

kahahu kavana maiṃ parama kulīnā | kapi cañcala sabahīṃ bidhi hīnā ||
prāta lei jo nāma hamārā | tehi dina tāhi na milai ahārā ||

दो॰ 7दोहा

अस मैं अधम सखा सुनु, मोहू पर रघुवीर ।
कीन्ही कृपा सुमिरि गुन, भरे बिलोचन नीर ॥

asa maiṃ adhama sakhā sunu, mohū para raghuvīra |
kīnhī kṛpā sumiri guna, bhare bilocana nīra ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0