लङ्का निसिचर निकर निवासा । इहाँ कहाँ सज्जन कर बासा ॥
मन महँ तरक करइ कपि लागा । तेहीं समय बिभीषन जागा ॥
laṅkā nisicara nikara nivāsā | ihām̐ kahām̐ sajjana kara bāsā ||
mana maham̐ taraka karai kapi lāgā | tehīṃ samaya bibhīṣana jāgā ||
5 श्लोक · 6 में से 60
हनुमान मन में सोचते हैं कि लंका तो राक्षसों का घर है, यहाँ सज्जन कैसे रहता है? उसी समय विभीषण जागकर राम राम का स्मरण करते हैं। कपि का हृदय हर्षित होता है, वे सज्जन को पहचान लेते हैं। वे सोचते हैं कि साधु से कभी काम नहीं बिगड़ता, इनसे परिचय करूँगा। ब्राह्मण का रूप धरकर वे बोलते हैं। विभीषण बाहर आकर प्रणाम करते हैं और कथा पूछते हैं। क्या आप हरि के दासों में से हैं? मेरे मन में आपके लिए बड़ी प्रीति उमड़ रही है। या आप दीनों के प्रेमी स्वयं श्रीराम हैं, जो मुझे बड़भागी बनाने आए हैं? तब हनुमान राम की पूरी कथा और अपना नाम बताते हैं। सुनते ही दोनों पुलकित हो जाते हैं और मन प्रभु के गुणों के स्मरण में डूब जाता है।
लङ्का निसिचर निकर निवासा । इहाँ कहाँ सज्जन कर बासा ॥
मन महँ तरक करइ कपि लागा । तेहीं समय बिभीषन जागा ॥
laṅkā nisicara nikara nivāsā | ihām̐ kahām̐ sajjana kara bāsā ||
mana maham̐ taraka karai kapi lāgā | tehīṃ samaya bibhīṣana jāgā ||
राम राम तेहिं सुमिरन कीन्हा । हृदयँ हरष कपि सज्जन चीन्हा ॥
एहि सन हठि करिहउँ पहिचानी । साधु ते होइ न कारज हानी ॥
rāma rāma tehiṃ sumirana kīnhā | hṛdayam̐ haraṣa kapi sajjana cīnhā ||
ehi sana haṭhi karihaum̐ pahicānī | sādhu te hoi na kāraja hānī ||
बिप्र रूप धरि बचन सुनाये । सुनत विभीषन उठि तहँ आये ॥
करि प्रनाम पूछी कुसलाई । बिप्र कहहु निज कथा बुझाई ॥
bipra rūpa dhari bacana sunāye | sunata vibhīṣana uṭhi taham̐ āye ||
kari pranāma pūchī kusalāī | bipra kahahu nija kathā bujhāī ||
की तुम्ह हरि दासन्ह महँ कोई । मोरें हृदय प्रीति अति होई ॥
की तुम्ह राम दीन-अनुरागी । आयहु मोहि करन बड़-भागी ॥
kī tumha hari dāsanha maham̐ koī | moreṃ hṛdaya prīti ati hoī ||
kī tumha rāma dīna-anurāgī | āyahu mohi karana bar̤a-bhāgī ||
तब हनुमन्त कही सब, राम कथा निज नाम ।
सुनत जुगल तन पुलक मन, मगन सुमिरि गुन ग्राम ॥
taba hanumanta kahī saba, rāma kathā nija nāma |
sunata jugala tana pulaka mana, magana sumiri guna grāma ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0