सुन्दरकाण्ड

अध्याय 60: नल नील और काण्ड का समापन

इति श्रीरामचरितमानसे सकलकलिकलुष विध्वंसने ज्ञान सम्पादनो नाम पञ्चमः सोपानः समाप्तः।

6 श्लोक · 60 में से 60

इस अध्याय में क्या होता है

नल नील और काण्ड का समापन

समुद्र कहता है, नाथ, नल और नील दो वानर भाइयों को बचपन में ऋषि का आशीर्वाद मिला था, उनके छूने से भारी पर्वत आपके प्रताप से तैरेंगे, और मैं भी यथाशक्ति सहायता करूँगा। समुद्र को बँधवाइए, जिससे यह सुयश तीनों लोकों में गाया जाए। वह विनती करता है कि इसी बाण से मेरे उत्तर तट पर बसे पापी दुष्टों को मारिए। रघुवीर तुरन्त उसकी पीड़ा हर लेते हैं। राम का बल देखकर समुद्र सुखी होता है और वन्दना करके घर जाता है। तुलसीदास गाते हैं कि यह चरित्र कलियुग का मल हरता है, जो सब आशा छोड़कर रघुपति के गुण गाते सुनते हैं, वे बिना नाव भवसागर तर जाते हैं। पुष्पिका पाँचवें सोपान का समापन करती है।

60.1

नाथ नील नल कपि दोउ भाई । लरिकाई रिषि आसिष पाई ॥
तिन्ह के परस किये गिरि भारे । तरिहहिँ जलधि प्रताप तुम्हारे ॥

nātha nīla nala kapi dou bhāī | larikāī riṣi āsiṣa pāī ||
tinha ke parasa kiye giri bhāre | tarihahim̐ jaladhi pratāpa tumhāre ||

60.2

मैं पुनि उर धरि प्रभुताई । करिहउँ बल अनुमान सहाई ॥
एहि बिधि नाथ पयोधि बँधाइअ । जेहिं यह सुजस लोक तिहुँ गाइअ ॥

maiṃ puni ura dhari prabhutāī | karihaum̐ bala anumāna sahāī ||
ehi bidhi nātha payodhi bam̐dhāia | jehiṃ yaha sujasa loka tihum̐ gāia ||

60.3

एहि सर मम उत्तर तट बासी । हतहु नाथ खल नर अघ रासी ॥
सुनि कृपाल सागर मन पीरा । तुरतहिं हरी राम रनधीरा ॥

ehi sara mama uttara taṭa bāsī | hatahu nātha khala nara agha rāsī ||
suni kṛpāla sāgara mana pīrā | turatahiṃ harī rāma ranadhīrā ||

60.4

देखि राम बल पौरुष भारी । हरषि पयोनिधि भयउ सुखारी ॥
सकल चरित कहि प्रभुहि सुनावा । चरन बन्दि पाथोधि सिधावा ॥

dekhi rāma bala pauruṣa bhārī | haraṣi payonidhi bhayau sukhārī ||
sakala carita kahi prabhuhi sunāvā | carana bandi pāthodhi sidhāvā ||

60.छं॰ 1छन्द

निज भवन गवनेउ सिन्धु श्रीरघुपतिहि यह मत भायऊ ।
यह चरित कलि मलहर जथामति, दास तुलसी गायऊ ॥
सुख भवन संसय समन दवन बिषाद रघुपति गुन गना ।
तजि सकल आस भरोस गावहि, सुनहि सन्तत सठ मना ॥

nija bhavana gavaneu sindhu śrīraghupatihi yaha mata bhāyaū |
yaha carita kali malahara jathāmati, dāsa tulasī gāyaū ||
sukha bhavana saṃsaya samana davana biṣāda raghupati guna ganā |
taji sakala āsa bharosa gāvahi, sunahi santata saṭha manā ||

दो॰ 60दोहा

सकल सुमङ्गल दायक, रघुनायक गुन गान ।
सादर सुनहिँ ते तरहिँ भव, सिन्धु बिना जलजान ॥

sakala sumaṅgala dāyaka, raghunāyaka guna gāna |
sādara sunahim̐ te tarahim̐ bhava, sindhu binā jalajāna ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0