लंकाकाण्ड

अध्याय 1: नल और नील सेतु बाँधना आरम्भ करते हैं

12 श्लोक · 1 में से 121

इस अध्याय में क्या होता है

नल और नील सेतु बाँधना आरम्भ करते हैं

लंकाकाण्ड का आरम्भ श्रीराम और काशीपति शंकर की संस्कृत स्तुतियों से होता है। समुद्र की बात सुनकर श्रीराम मंत्रियों को बुलाते हैं: अब देर किस काम की, सेतु बनाओ जिससे सेना उतरे। जाम्बवान हाथ जोड़कर कहते हैं कि प्रभु, आपका नाम ही वह सेतु है जिस पर चढ़कर मनुष्य भवसागर पार करते हैं। हनुमान विनोद से कहते हैं कि प्रभु के प्रताप ने पहले समुद्र को सोख लिया, फिर शत्रु की स्त्रियों के आँसुओं ने उसे खारे जल से भर दिया। जाम्बवान नल और नील से राम का स्मरण करके सेतु बनाने को कहते हैं। भालू और वानर जयकार करते हुए ऊँचे पर्वत और वृक्ष ला देते हैं और दोनों भाई सेतु रचते हैं।

1.श्लो॰ 1

रामं कामारिसेव्यं भवभयहरणं कालमत्तेभसिंहं ।
योगीन्द्रं ज्ञानगम्यं गुणनिधिमजितं निर्गुणं निर्विकारम् ॥
मायातीतं सुरेशं खलवधनिरतं ब्रह्मवृन्दैकदेवं ।
वन्दे कन्दावदातं सरसिजनयनं देवमुर्वीशरूपम् ॥

rāmaṃ kāmārisevyaṃ bhavabhayaharaṇaṃ kālamattebhasiṃhaṃ |
yogīndraṃ jñānagamyaṃ guṇanidhimajitaṃ nirguṇaṃ nirvikāram ||
māyātītaṃ sureśaṃ khalavadhanirataṃ brahmavṛndaikadevaṃ |
vande kandāvadātaṃ sarasijanayanaṃ devamurvīśarūpam ||

1.श्लो॰ 2

शंखेन्द्वाभमतीवसुन्दरतनुं शार्दूलचर्माम्बरं ।
कालव्यालकरालभूषणधरं गङ्गाशशाङ्क प्रियम् ॥
काशीशं कलिकल्मषौघशमनं कल्याणकल्पद्रुमं ।
नौमीड्यं गिरिजापतिं गुणनिधिं कन्दर्पहं शङ्करम् ॥

śaṃkhendvābhamatīvasundaratanuṃ śārdūlacarmāmbaraṃ |
kālavyālakarālabhūṣaṇadharaṃ gaṅgāśaśāṅka priyam ||
kāśīśaṃ kalikalmaṣaughaśamanaṃ kalyāṇakalpadrumaṃ |
naumīḍyaṃ girijāpatiṃ guṇanidhiṃ kandarpahaṃ śaṅkaram ||

1.श्लो॰ 3

यो ददाति सतां शम्भुः कैवल्यमपि दुर्लभम् ।
खलानां दण्डकृद्योऽसौ शङ्करः शं तनोतु मे ॥

yo dadāti satāṃ śambhuḥ kaivalyamapi durlabham |
khalānāṃ daṇḍakṛdyo'sau śaṅkaraḥ śaṃ tanotu me ||

दो॰ 1दोहा

लव निमेष परमानु जुग, बरष कलप सर चंड ।
भजसि न मन तेहि राम कहँ, काल जासु कोदंड ॥

lava nimeṣa paramānu juga, baraṣa kalapa sara caṃḍa |
bhajasi na mana tehi rāma kaham̐, kāla jāsu kodaṃḍa ||

1.सो॰सोरठा

सिन्धु बचन सुनि राम, सचिव बोलि प्रभु अस कहेउ ।
अब बिलम्ब केहि काम, करहु सेतु उतरै कटक ॥

sindhu bacana suni rāma, saciva boli prabhu asa kaheu |
aba bilamba kehi kāma, karahu setu utarai kaṭaka ||

1.सो॰सोरठा

सुनहु भानु-कुल-केतु, जामवन्त कर जोरि कह ।
नाथ नाम तव सेतु, नर चढ़ि भव सागर तरिहिं ॥

sunahu bhānu-kula-ketu, jāmavanta kara jori kaha |
nātha nāma tava setu, nara car̤hi bhava sāgara tarihiṃ ||

1.1

यह लघु जलधि तरत कति बारा । अस सुनि पुनि कह पवनकुमारा ॥
प्रभु प्रताप बड़वानल भारी । सोखेउ प्रथम पयोनिधि बारी ॥

yaha laghu jaladhi tarata kati bārā | asa suni puni kaha pavanakumārā ||
prabhu pratāpa bar̤avānala bhārī | sokheu prathama payonidhi bārī ||

1.2

तव रिपु-नारि रुदन जल-धारा । भरेउ बहोरि भयउ तेहिं खारा ॥
सुनि अति-उकुति पवनसुत केरी । हरषे कपि रघुपति तन हेरी ॥

tava ripu-nāri rudana jala-dhārā | bhareu bahori bhayau tehiṃ khārā ||
suni ati-ukuti pavanasuta kerī | haraṣe kapi raghupati tana herī ||

1.3

जामवंत बोले दोउ भाई । नल-नीलहि सब कथा सुनाई ॥
राम-प्रताप सुमिरि मन माहीं । करहु सेतु प्रयास कछु नाहीं ॥

jāmavaṃta bole dou bhāī | nala-nīlahi saba kathā sunāī ||
rāma-pratāpa sumiri mana māhīṃ | karahu setu prayāsa kachu nāhīṃ ||

1.4

बोलि लिये कपि निकर बहोरी । सकल सुनहु विनती कछु मोरी ॥
राम-चरन-पङ्कज उर धरहू । कौतुक एक भालु कपि करहू ॥

boli liye kapi nikara bahorī | sakala sunahu vinatī kachu morī ||
rāma-carana-paṅkaja ura dharahū | kautuka eka bhālu kapi karahū ||

1.5

धाबहु मरकट-बिकट बरूथा । आनहु बिटप गिरिन्ह के जूथा ॥
सुनि कपि भालु चले करि हूहा । जय रघुबीर प्रताप-समूहा ॥

dhābahu marakaṭa-bikaṭa barūthā | ānahu biṭapa girinha ke jūthā ||
suni kapi bhālu cale kari hūhā | jaya raghubīra pratāpa-samūhā ||

दो॰ 1दोहा

अति उतङ्ग गिरि पादप, लीलहिं लेहिँ उठाइ ।
आनि देहिँ नल नीलहि, रचहिँ ते सेतु बनाइ ॥

ati utaṅga giri pādapa, līlahiṃ lehim̐ uṭhāi |
āni dehim̐ nala nīlahi, racahim̐ te setu banāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0