सुन्दरकाण्ड

अध्याय 50: समुद्र कैसे पार हो

5 श्लोक · 50 में से 60

इस अध्याय में क्या होता है

समुद्र कैसे पार हो

ऐसे प्रभु को छोड़कर जो दूसरे को भजते हैं, वे बिना पूँछ और सींग के पशु हैं। प्रभु ने विभीषण को अपना जन मानकर अपना लिया, और प्रभु का यह स्वभाव वानरों के मन को भाया। फिर सर्वज्ञ, सबके हृदय में बसने वाले, कारण से मनुष्य बने और राक्षस कुल का नाश करने वाले, नीति के रक्षक प्रभु कहते हैं, कपीश और लंकापति, सुनो, यह गहरा समुद्र कैसे पार हो? यह मगर, साँप और मछलियों से भरा है, अथाह है और सब प्रकार दुस्तर है। लंकेश कहते हैं, रघुनायक, आपका एक बाण करोड़ों समुद्र सोख सकता है, फिर भी नीति यही कहती है कि जाकर समुद्र से विनती कीजिए। प्रभु, समुद्र आपके कुल का गुरु है, वह विचारकर उपाय बताएगा, और सारे भालू वानर बिना श्रम पार हो जाएँगे।

50.1

अस प्रभु छाड़ि भजहिँ जे आना । ते नर पसु बिनु पूँछ विषाना ॥
निज जन जानि ताहि अपनावा । प्रभु सुभाव कपि कुल मन भावा ॥

asa prabhu chār̤i bhajahim̐ je ānā | te nara pasu binu pūm̐cha viṣānā ||
nija jana jāni tāhi apanāvā | prabhu subhāva kapi kula mana bhāvā ||

50.2

पुनि सर्वज्ञ सर्व उर बासी । सर्वरूप सब रहित उदासी ॥
बोले बचन नीति प्रतिपालक । कारन मनुज दनुज कुल घालक ॥

puni sarvajña sarva ura bāsī | sarvarūpa saba rahita udāsī ||
bole bacana nīti pratipālaka | kārana manuja danuja kula ghālaka ||

50.3

सुनु कपीस लङ्कापति बीरा । केहि बिधि तरिअ जलधि गम्भीरा ॥
सङ्कुल मकर उरग झष जाती । अति अगाध दुस्तर सब भाँती ॥

sunu kapīsa laṅkāpati bīrā | kehi bidhi taria jaladhi gambhīrā ||
saṅkula makara uraga jhaṣa jātī | ati agādha dustara saba bhām̐tī ||

50.4

कह लंकेस सुनहु रघुनायक । कोटि सिन्धु सोषक तब सायक ॥
जद्यपि तदपि नीति असि गाई । बिनय करिय सागर सन जाई ॥

kaha laṃkesa sunahu raghunāyaka | koṭi sindhu soṣaka taba sāyaka ||
jadyapi tadapi nīti asi gāī | binaya kariya sāgara sana jāī ||

दो॰ 50दोहा

प्रभु तुम्हार कुलगुर जलधि, कहिहि उपाय बिचारि ।
बिनु प्रयास सागर तरिहि, सकल भालु-कपि धारि ॥

prabhu tumhāra kulagura jaladhi, kahihi upāya bicāri |
binu prayāsa sāgara tarihi, sakala bhālu-kapi dhāri ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0